Clinical Establishment Bill पर IMA की आपत्ति, टाकलकर बोले- मरीजों के हित में बने व्यवहारिक और पारदर्शी कानून
Clinical Establishment Bill 2026: आईएमए ने महाराष्ट्र के प्रस्तावित क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट विधेयक-2026 पर सवाल उठाते हुए मरीजों और चिकित्सकों के हित में संतुलित और व्यावहारिक कानून बनाने की मांग की।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
डॉ. अनुपम टाकलकर (सोर्सः सोशल मीडिया)
IMA Clinical Establishment Bill 2026: महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट विधेयक-2026 को लेकर चिकित्सकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अनुपम टाकलकर ने कहा कि संगठन कानून का विरोध नहीं कर रहा है।
बल्कि ऐसे प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है जो ईमानदार चिकित्सकों पर अनावश्यक प्रशासनिक बोझ बढ़ा सकते हैं और ग्रामीण व छोटे अस्पतालों के संचालन को प्रभावित कर सकते हैं।
डॉ. टाकलकर का क्या है कहना?
डॉ. टाकलकर ने कहा कि प्रत्येक मरीज सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी उपचार चाहता है तथा प्रत्येक चिकित्सक भी यही उद्देश्य रखता है। इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं के नियमन की आवश्यकता से किसी को आपत्ति नहीं है। हालांकि किसी भी कानून की सफलता उसके उद्देश्य से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन से तय होती है।
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उन्होंने सबसे पहले इस बात पर सवाल उठाया कि यदि विधेयक का उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करना है, तो सरकारी अस्पतालों को इसके दायरे से बाहर क्यों रखा गया है। उनका कहना है कि मरीज चाहे सरकारी अस्पताल में उपचार करा रहा हो या निजी अस्पताल में, गुणवत्ता के मानक समान होने चाहिए।
डॉ. अनुपम टाकलकर ने नए अस्पताल या क्लिनिक को स्थायी मान्यता देने से पहले जनता से आपत्तियां आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा या व्यक्तिगत कारणों से अनावश्यक आपत्तियां सामने आ सकती हैं, जिसका सबसे अधिक नुकसान मरीजों और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को होगा।
उन्होंने प्रस्तावित परिषद और पंजीकरण प्राधिकरण में चिकित्सकों तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसे पेशेवर संगठनों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की भी मांग की। उनका कहना है कि जो लोग प्रतिदिन स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करते हैं, उनकी भागीदारी कानून निर्माण और उसके क्रियान्वयन में आवश्यक है।
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IMA का क्या हैं उद्देशय?
निरीक्षण, पंजीकरण निलंबन तथा रद्द करने जैसी व्यापक शक्तियों पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन ईमानदारी से कार्य करने वाले चिकित्सकों में भय का वातावरण नहीं बनना चाहिए। उन्होंने छोटे ग्रामीण क्लिनिक, मध्यम अस्पताल और बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों के लिए अलग-अलग व्यावहारिक मानक तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
IMA ने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य कानून का विरोध करना नहीं, बल्कि ऐसा संतुलित, व्यवहारिक और सर्वसमावेशी कानून बनाना है, जो मरीजों के अधिकारों की रक्षा करने के साथ चिकित्सकों के सम्मान को भी बनाए रखे और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाए।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट
