Tata Memorial Hospital बड़ी की खोज! कैंसर मरीजों के लिए 350 रुपए का पपीता बनेगा रामबाण
Tata Memorial Hospital: मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल के शोधकर्ताओं ने बड़ी सफलता हासिल की है। मात्र ₹350 की लागत वाला पपीते की पत्तियों का अर्क कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ाएगा।
- Written By: रूपम सिंह
टाटा अस्पताल की बड़ी खोज, पपीता (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Tata Memorial Hospital Cancer Treatment: मुंबई टाटा मेमोरियल अस्पताल के शोधकर्ताओं ने कैंसर उपचार में आयुर्वेद और एलोपैथ चिकित्सा के संगम से एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। अध्ययन में पाया गया है कि पपीते की पत्तियों का अर्क कीमोथेरेपी के दौरान मरीजों में घटने वाले प्लेटलेट्स को तेजी से बढ़ाने में प्रभावी हो सकता है। करीब 350 रुपए की लागत वाली यह स्वदेशी दवा महंगी प्लेटलेट-बढ़ाने वाली थेरेपी का किफायती विकल्प बनकर उभरी है।
इससे कैंसर मरीजों के इलाज का आर्थिक बोझ भी कम होने की उम्मीद है। टाटा मेमोरियल अस्पताल के शोधकर्ताओं के अध्ययन में पाया गया है कि पपीते की पत्तियों का अर्क कीमोथेरेपी के कारण प्लेटलेट्स की संख्या में होने वाली कमी से जूझ रहे कैंसर मरीजों के लिए प्रभावी और किफायती विकल्प साबित हो सकता है।
अध्ययन के निष्कर्ष पहले 2025 में शिकागो में आयोजित अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किए गए थे और बाद में 2026 में जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुए। टाटा अस्पताल में डॉ. विकास ओस्तवाल के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में सॉलिड ट्यूमर के 219 कैंसर मरीजों को शामिल किया गया।
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पूरा कोर्स लगभग 350 रुपए में
रोमिप्लोस्टिम के मूल ब्रांड की एक खुराक की कीमत लगभग 1.6लाख रुपए है, जबकि जेनेरिक संस्करणों की कीमत 4,000 से 6,000 रुपए प्रति खुराक है। इस स्थिति में पहुंचने के बाद मरीज को अक्सर कई खुराकों की आवश्यकता होती है। एल्ट्रोम्बोपैग की गोलियों की एक स्ट्रिप की कीमत लगभग 3,000 से 4,000 रुपए है और बार- बार उपचार की आवश्यकता हो सकती है। इसके मुकाबले पपीते के पत्तों के अर्क से बना टैबलेट का पूरा कोर्स केवल लगभग 350 में मिलता है, जो इसे काफी अधिक किफायती बनाता है।
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नहीं देखे गए गंभीर दुष्प्रभाव
शोधकर्ताओं ने बताया कि परीक्षण के दौरान यह अर्क सुरक्षित और अच्छी तरह सहन करने योग्य पाया गया। इससे गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखे गए। हालांकि, उन्होंने इसकी कार्यप्रणाली, सक्रिय घटकों की और व्यापक शोध की आवश्यकता बताई है। यह शोध कीमोथेरेपी और डेंगू, दोनों स्थितियों में कम प्लेटलेट्स वाले मुंबई मरीजों के लिए सस्ती और प्रभावी उपचार पद्धति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
