पानी से डॉक्टर तक कमी, नागपुर जिले के उमरेड ग्रामीण अस्पताल बदहाल, मरीजों ने उठाए गंभीर सवाल

Umred Rural Hospital: नागपुर जिले के उमरेड ग्रामीण अस्पताल में पानी, डॉक्टर, ट्रॉमा सेंटर और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
From Water Shortages to a Lack of Doctors: Nagpur District's Umred Rural Hospital in Shambles; Patients Raise Serious Concerns
उमरेड का ग्रामीण अस्पताल की विभिन्न समस्याओं को लेकर चर्चा(सोर्स: नवभारत फाईल फोटो)
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Umred Rural Hospital Doctor Shortage: उमरेड का ग्रामीण अस्पताल पिछले कई माह से गंभीर समस्याओं से जूझता दिखाई दे रहा है। मरीजों और नागरिकों का आरोप है कि इस अस्पताल में आवश्यक सुविधाओं का भारी अभाव है, जिसके कारण मरीजों को उपचार के साथ-साथ अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। पीने के स्वच्छ पानी से लेकर जनरेटर व्यवस्था, शवविच्छेदन गृह, ट्रॉमा सेंटर, डॉक्टरों की कभी, अस्वच्छता, बदबूयुक्त गंदगी और आवारा कुत्तों का आतंक आदि अनेक समस्याओं ने उमरेड ग्रामीण हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गर्मी से मरीज बेहाल

प्राप्त जानकारी के तहत व्हॉइस ऑफ मीडिया की टीम जब उमरेड ग्रामीण हॉस्पिटल पहुंची, तब अधीक्षक कार्यालय में अस्पताल की विभिन्न समस्याओं को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। तेज गर्मी और उमस के बीच अस्पताल अधीक्षक सहित उपस्थित पत्रकारों को भी काफी देर तक परेशानी का सामना करना पड़ा। इस गंभीर घटना ने अस्पताल को बिजली व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की पोल खोल दी।

जगह-जगह गंदगी के ढेर इस दौरान पूर्व विधायक राजू पारवे, उमरेड नगर परिषद नगर सेवक डॉ. मुकेश मुदगल, अमित लाहेकर, सुभाष कावटे, विक्रांत मुडे आदि भी अस्पताल पहुंचे और उन्होंने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जगह-जगह गंदगी के डेर, हॉस्पिटल प्रांगण के खुले परिसर में घूमते आवारा कुत्ते और संडास मे अस्वच्छ, गंदगी दिखाई दी।

समिति सदस्यों को नहीं दी जाती जानकारी उमरेड नगर परिषद के नगरसेवक डॉ. मुकेश मुदगल, जो उमरेड ग्रामीण रुग्णालय समिति के सदस्य हैं, उन्होंने भी गंभीर आरोप लगाए, उनका कहना है कि उन्हें उमरेड ग्रामीण हॉस्पिटल में अब तक किसी मीटिंग की सूचना तक नहीं दी गई। इससे अस्पताल प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में मरीजों की परेशानियां और बढ़ सकती है। इस अवसर पर विनोद मेश्राम, रोशन पाटील, महादेव सोरते, पांडुरंग चौधरी, भोजराज नागपुरे, पवन शिंगणे, भूपेश पाठरावे, विलास धनविजय, राहुल गुप्ता, प्रा। शिवाजी घरडे, रामविलास नेवारे उपस्थित थे।

बिना डॉक्टरों के चल रहा ट्रॉमा सेंटर

उमरेड शहर की बड़ी आबादी और सड़कों पर लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए पुर्व विधायक राजू पारवे के प्रयासों से ग्रामीण अस्पताल में ट्रॉमा केयर सेंटर का उद्घाटन किया गया था। उस समय नागरिकों को उम्मीद थी कि गंभीर दुर्घटना पीड़ितों को अब नागपुर रेफर नहीं करना पड़ेगा लेकिन आग स्थिति यह है कि ट्रॉमा सेंटर केवल एक शोभा की बिल्डिंग बनकर रह गया है। हर समय मरीजों को नासूर रेफर किया जाता है। डॉ. कंजारी ने बताया कि ट्रॉमा यूनिट शुरू करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टर, सौटी स्कैन मशीन और प्रशिक्षित कर्मचारियों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि इस यूनिट को सुधारू रूप से शुरू करने के लिए कम से कम पांच विशेषज्ञ डॉक्टर और चार कर्मचारियों की आवश्यकता है, लेकिन शासन स्तर पर अब तक नियुक्तियां नहीं की गई है। सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध होने पर अस्पताल प्रशासनमा युनिट शुरू करने के लिए तैयार है।

आबादी अधिक, लेकिन बेड कम

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उमरेड शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या को देखते हुए यहां कम से कम 100 बेड का अस्पताल होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में उमरेड ग्रामीण हॉस्पिटल केवल 30 बेड की क्षमता यर चल रहा है। जिले के अन्य छोटे क्षेत्रों में अधिक डॉक्टर और सुविधाएं उपलब्ध है जबकि उमरेड जैसे बड़े क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति में हैं। अस्पताल में लगभग 50 कर्मचारियों का स्टाफ है, लेकिन नियमित रूप से केवल दो डॉक्टर ही कार्यरत है। इसके अलावा दो डॉक्टर डेप्युटेशन पर तथा एक सुमन योजना के अंतर्गत उपलब्ध है। इतने कम डॉक्टरों के भरोसे हजारों मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

डायलिसिस मरीजों की बड़ी परेशानी

ग्रामीण हॉस्पिटल में डायलिसिस सुविधा भी अपर्याप्त साबित हो रही है। अस्पताल में कुल 41 डायलिसिस मरीज पंजीकृत है, लेकिन केवल पांच बेड उपलब्ध है। इनमें डा मरीज नियमित उपचार ले रहे है, जबकि 10 मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में उपचार लेना पड़ रहा है। इससे गरीब मरीजों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

प्रशासन को लगाई जमकर फटकार

अस्पताल की गंभीर स्थिति देखने के बाद पूर्व विधायक राजूभाऊ पाये ने वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. प्रभाकर कंजारी को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यदि अस्तात प्रशासन व्यवस्थाएं संभालने में असफल साबित हो रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों को पद छोड़ देना चाहिए, उन्होंने बिजली तथा पानी व्यवस्था, हॉस्पिटल तथा परिसर में गंदगी, सहास अस्वछत, शवविच्छेदन गृह की समस्याएं, हॉस्पिटल तथा परिसर में आवारा कुत्तों का आतंक और मरीजों की असुविधाओं को लेकर तीखी नाराजगी व्यक्त की, इस दौरान उन्होंने नागपुर निथार संबंधित वैद्यकीय अधिकारियों से फोन पर चर्चा कर अस्पताल को मिलने वाले इमरजेंसी कंड की जानकारी भी ली।

पेयजल भी नसीब नहीं

  • मरीजों के परिजनों ने शिकायत की कि अस्पताल में मिलने वाला पीने का उनी भी स्वच्छ नहीं है।
  • इसके बाद पानी की टंकियों की जाब की गई जहां कई दिनों से टंकियों की सफाई नहीं होने और टंकियों पर ढक्कन तक नहीं होने की बात उजागर हुई।
  • इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
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