एक्शन मोड में आ गया नारकोटिक्स विभाग, युवाओं को नशे से दूर रहने की दे रहे सलाह
नशे की लत ने देश के युवाओं को प्रगति के मार्ग से भटका दिया है। आज की युवा पीढ़ी दिनों दिन नशे के गिरफ्त में डूबती जा रही है। हैरानी की बात तो ये है कि ड्रग्स का नशा स्कूल और कॉलेज के छात्र कर रहे हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स -सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhaji Nagar News In Hindi: भविष्य संवारने की आयु में युवा पीढ़ी आए दिन नशे की गिरफ्त में फंसती जा रही है। हैरत की बात यह है कि इसके प्रमुख ग्राहक स्कूल व महाविद्यालय के छात्र ही हैं।
खासतौर पर उच्च वर्गीय संपन्न घरों के बच्चे, क्लब व पार्टियों में स्टेटस सिम्बॉल के तौर पर ड्रग्स का नशा करने वाले युवा छात्र अग्रणी हैं। अपना भविष्य उज्ज्वल बनाने के बजाए कुछ क्षणों के रोमांच के लिए ये युवा उसे खतरे में डालने आमदा हैं।
नागरिकों का कहना है कि पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की, परंतु नशे की जड़ पर यदि वार नहीं हुआ, तो कल हमारे ही बच्चे इस धुंए में खो जाएंगे। शहर में हाल ही में 15 लाख रुपए मूल्य का डेढ़ किलो उच्च गुणवत्ता वाला चरस जब्त किया गया है। गणेशोत्सव की पृष्ठभूमि पर मुकुंदवाड़ी पुलिस ने अंबिका नगर क्षेत्र में छापा मारकर 5 आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। हालांकि, मुख्य डीलर फरार है। पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल से कई ग्राहकों की जानकारी मिली है।
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पुलिस ने अब तक 410 आरोपी किए गिरफ्तार
मिटमिटा में 2020 में चरस की सैकड़ो गोलियां जब्त की गई थीं। 2021 में टाउन हॉल व सिडको क्षेत्र में युवा गिरफ्तार। 2022 में रंजना पांडे का मामला चर्चित 2024-25 में चरस, एमडी, गांजा आदि नशीले पदार्थों की बड़ी मात्रा में खेप मिली थी। पुलिस कमिश्नरेट की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्रांच ने जनवरी 2024 से मई 2025 के बीच बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए करीब 90 लाख, 76,000 रुपए मूल्य का गांजा, नशीली गोलियां, एमडी, चरस आदि जब्त किया था। इन मामलों में 410 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
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जेल से छूटने पर आरोपी फिर नशे के धंधे में लिप्त
अक्सर देखने में आता है कि लगातार कार्रवाईया होती हैं और आरोपी जेल भी जाते हैं, पर नशे की चेन खत्म होते नहीं दिख रही है। जेल से छूटने के बाद आरोपी फिर उसी धंधे में लिप्त हो जाते हैं। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि शहर में कितने गिरोह सक्रिय हैं, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। ड्रग्स में फंसा हर छात्र समाज व भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। एक ओर माता-पिता बच्चों के करियर के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं नशे का बाजार नई पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है।
