ऑनलाइन फ्रॉड में फंसे पैसे निकालना हुआ आसान, 50 हजार से कम रकम अब बिना कोर्ट ऑर्डर होगी वापस, जानें नए नियम
Cyber Fraud Refund Rule: केंद्र सरकार ने साइबर ठगी पीड़ितों को राहत दी है। 50 हजार रुपये से कम की ऑनलाइन धोखाधड़ी में अब बिना कोर्ट ऑर्डर राशि वापस मिल सकेगी। नई SOP से रिफंड प्रक्रिया तेज होगी।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Online Fraud Refund Process: देश में डिजिटल लेनदेन के बढ़ते विस्तार के साथ साइबर ठगी की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। इसी बीच आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। अब 50 हजार रुपये से कम की ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को महीनों तक अदालतों और बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ऐसे मामलों में बिना न्यायालय के आदेश के भी राशि वापस मिलने का रास्ता खुल गया है।
गृह मंत्रालय ने साइबर ठगी से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी को मंजूरी दी है। यह एसओपी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अंतर्गत संचालित साइबर फाइनेंशियल क्राइम रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम का हिस्सा होगी। इसके तहत छोटी राशि की ठगी के मामलों में धनवापसी की प्रक्रिया को सरल और तेज किया गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी नागरिक के साथ 50 हजार रुपये से कम की ऑनलाइन ठगी हुई है और वह राशि बैंक या किसी अन्य वित्तीय खाते में फ्रीज कर दी गई है, तो अब ऐसे मामलों में अदालत के आदेश की अनिवार्यता नहीं रहेगी। संबंधित जांच पूरी होने के बाद पीड़ित को राशि लौटाई जा सकेगी। इससे अब तक छोटी ठगी में लंबे समय तक फंसे रहने वाले पैसों की समस्या का समाधान होगा।
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सभी वित्तीय संस्थानों के लिए समान नियम लागू
नई एसओपी के तहत बैंकों के साथ साथ डिजिटल पेमेंट एप्स, नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां, ई कॉमर्स वेबसाइट्स, शेयर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, म्यूचुअल फंड कंपनियां और अन्य सभी वित्तीय संस्थानों के लिए एक समान नियम लागू किए गए हैं। जैसे ही किसी संदिग्ध लेनदेन को लेकर साइबर अपराध की शिकायत दर्ज होती है, संबंधित संस्थानों को तय प्रक्रिया के अनुसार तत्काल कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। इससे साइबर अपराध की जांच में पारदर्शिता और एकरूपता आएगी।
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साइबर ठगी की बढ़ती घटनाएं बनी चुनौती
देश में साइबर ठगी की घटनाएं अब गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। हाल ही में दिल्ली में एक बुजुर्ग एनआरआई दंपती के साथ ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया था, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा। के आंकड़ों के अनुसार पिछले छह वर्षों में ऑनलाइन ठगी के कारण भारतीय नागरिकों को 52 हजार 976 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। यह आंकड़े देश की साइबर सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी माने जा रहे है। नई एसओपी को साइबर ठगी से निपटने की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी कदम माना जा रहा है, जिससे आम नागरिकों का डिजिटल लेन देन पर भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है।
90 दिनों में खाता या राशि रिलीज करना अनिवार्य
साइबर ठगी के संदेह में कई बार निर्दोष नागरिकों के बैंक खाते या धनराशि फ्रीज कर दी जाती है। नई एसओपी ऐसे लोगों के लिए भी राहत लेकर आई है। पुलिस जांच के बाद यदि संबंधित व्यक्ति निर्दोष पाया जाता है और उस मामले में कोई न्यायालयी आदेश या निर्देश नहीं है, तो बैंकों को 90 दिनों के भीतर संबंधित खाता या फंड रिलीज करना अनिवार्य होगा।
