Sambhajinagar मनपा चुनाव: नामांकन शुरू, लेकिन निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में

Sambhajinagar Election: संभाजीनगर मनपा चुनाव के लिए नामांकन शुरू होने के 3 दिन बाद भी उड़न दस्ते, स्थायी निगरानी दल और वीडियो सर्विलांस टीमें जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं दिख रहीं हैं।
Sambhajinagar मनपा चुनाव: नामांकन शुरू, लेकिन निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Municipal Corporation Elections: छत्रपति संभाजीनगर मनपा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 23 दिसंबर से शुरू हो चुकी है, पर चुनाव आचार संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक उड़न दस्ते, स्थायी निगरानी दल व वीडियो सर्विलांस टीमें अब तक जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं दिख रही हैं।

तीन दिन बीत जाने के बावजूद ये टीमें केवल कागजों पर ही मौजूद होने की खबर है। शहर के 29 प्रभागों में 115 नगरसेवक चुनने के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है। पहले दो दिनों में केवल 2 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया है।

नौ स्थानों पर निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं व अधिकारियों-कर्मचारियों की नियुक्ति भी की गई है। बावजूद इसके निर्वाचन अधिकारियों के अधीन उड़न दस्ते व स्थायी निगरानी दल मैदान में नजर नहीं आ रहे हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन से ही इन दलों का सक्रिय रहना अनिवार्य है। हकीकत यह है कि शहर के प्रवेश द्वारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व हवाई अड्डे के आसपास कहीं भी निगरानी दल कार्यरत दिखाई नहीं दे रहे हैं।

कुछ स्थानों पर शेड व कुर्सियां लगाई गई

कुछ स्थानों पर केवल अस्थायी शेड व कुर्सियां लगाई गई हैं, पर वास्तविक नियंत्रण व्यवस्था पूरी तरह गायब है। निगरानी दलों की अनुपस्थिति के कारण आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतें कहां की जाए, यह सवाल आम नागरिकों के बीच उठने लगा है।

इच्छुक उम्मीदवारों व राजनीतिक दलों की ओर से चुनावी नियमों की अनदेखी किए जाने की चर्चा भी जोरों पर है। प्रशासन की निर्घक्रयता के चलते उन्हें खुली छूट मिल रही है, ऐसा कहा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, उड़न दस्ते व स्थायी निगरानी दलों के लिए नियुक्त अधिकारी-कर्मचारी अब तक ड्यूटी पर रिपोर्ट नहीं कर पाए है। साथ ही, पुलिस प्रशासन की ओर से भी चुनावी कार्य के लिए आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर ही प्रश्नचिहन लग गया है।

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