हौसले की उड़ान: न हाथ हैं, न लेखक का सहारा; पैरों की उंगलियों से 'सूरज' लिख रहा सफलता की कहानी

Divyang Student Success: महाराष्ट्र बोर्ड की 12वीं परीक्षा में दिव्यांग छात्र सूरज उबाले पैरों से लिखकर परीक्षा दे रहे हैं। स्क्राइब का विकल्प होने के बावजूद उन्होंने खुद लिखने का फैसला किया।
Suraj Ubale HSC Exam: हौसले की उड़ान: न हाथ हैं, न लेखक का सहारा; पैरों की उंगलियों से 'सूरज' लिख रहा सफलता की कहानी
पैरों से बोर्ड की परीक्षा लिखते सूरज शिवराज उबाले (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Suraj Ubale HSC Exam: अक्सर लोग छोटी-छोटी मुश्किलों के सामने घुटने टेक देते हैं, लेकिन महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के रहने वाले सूरज शिवराज उबाले ने साबित कर दिया है कि अगर मन में संकल्प हो, तो शरीर की बाधाएं कभी रास्ता नहीं रोक सकतीं। मंगलवार से शुरू हुई महाराष्ट्र राज्य बोर्ड की 12वीं (HSC) की परीक्षा में सूरज आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बने हुए हैं।

नांदेड़ जिले के गडेगांव के निवासी सूरज के दोनों हाथ जन्म से ही नहीं हैं, लेकिन जब वे कंधार कस्बे के श्री शिवाजी कॉलेज में परीक्षा देने पहुंचे, तो उनकी हिम्मत देखकर वहां मौजूद शिक्षक और छात्र दंग रह गए।

लेखक लेने से किया इनकार

नियमों के अनुसार, सूरज जैसे दिव्यांग छात्रों को परीक्षा में 'राइटर' या लेखक की सुविधा दी जाती है, ताकि उन्हें लिखने में परेशानी न हो। हालांकि, सूरज ने इस सुविधा को ठुकरा दिया। उनके माता-पिता ने बताया कि सूरज ने खुद अपने पैरों से लिखने का फैसला किया। परीक्षा हॉल में सूरज जमीन पर बैठकर, अपने पैरों की उंगलियों के बीच पेन फँसाकर पूरी एकाग्रता के साथ अंग्रेजी का पेपर लिखते नजर आए।

10वीं में भी गाड़े थे झंडे

सूरज के पिता शिवराज उबाले भावुक होकर बताते हैं कि मेरा बेटा जन्म से ही दिव्यांग है, लेकिन उसने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उसके पैर ही उसके हाथ हैं। उसने 10वीं की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 64% अंक हासिल किए थे। उसका संघर्ष समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है और मुझे उस पर गर्व है।

अधिकारियों ने थपथपाई पीठ

सूरज के इस जज्बे को देखकर उपतहसीलदार उर्मिला कुलकर्णी, केंद्र अधीक्षक अशोक वरपड़े और प्राचार्य मुरलीधर घोरबंद ने उनकी सराहना की। प्राचार्य ने कहा कि सूरज ने साहस और सम्मान के साथ अपनी दिव्यांगता पर विजय पाने का रास्ता चुना है। उनकी यह जिजीविषा उन लाखों छात्रों के लिए एक सीख है जो तनाव में आकर हिम्मत हार जाते हैं।

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