प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Sambhajinagar Municipal Revenue: छत्रपति संभाजीनगर मनपा के नगर रचना विभाग ने बीते दस महीनों में कार्यक्षमता और पारदर्शिता का मजबूत उदाहरण पेश किया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से दी गई निर्माण अनुमतियों के जरिए विभाग ने मनपा को 98 करोड़ रुपये का राजस्व उपलब्ध कराया है। बड़ी संख्या में प्रस्तावों को समयबद्ध मंजूरी मिलने से विभाग की प्रशासनिक क्षमता एक बार फिर साबित हुई है।
मनपा के नगर रचना विभाग को 1 अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 की अवधि में कुल 1800 निर्माण अनुमति प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इन प्रस्तावों में से आवश्यक जांच और नियमों की पूर्ति के बाद 1322 प्रस्तावों को अंतिम स्वीकृति दी गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग ने तय समयसीमा में काम को प्राथमिकता के साथ पूरा किया।
निर्माण अनुमति के लिए वास्तुविशारदों के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाते हैं। संबंधित जोन के उप अभियंताओं द्वारा इन प्रस्तावों की तकनीकी जांच की जाती है। इसमें भूखंड का क्षेत्रफल।
प्रस्तावित निर्माण क्षेत्र। चारों ओर छोड़ी गई खुली जगह और विकास नियंत्रण नियमों का पालन किया गया है या नहीं। इसकी सख्त जांच होती है। त्रुटियां पाए जाने पर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। सभी नियम पूरे होने और निर्धारित 60 दिनों के भीतर शुल्क जमा होने पर ही अनुमति दी जाती है।
स्वीकृत निर्माण अनुमतियों से मनपा को कुल 98 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इस आशय से मनपा की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। साथ ही नगर रचना विभाग की राजस्व वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।
निर्माण अनुमति मिलने के बाद भवन पूर्ण करने के लिए एक से डेढ वर्षे की अवधि निर्धारित की जाती है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उप अभियंताओं द्वारा स्वीकृत नवरी के अनुसार स्थल निरीक्षण किया जाता है।
यह भी पढ़ें:-अतिवृष्टि बनी वरदान, रबी बुवाई ने तोड़ा रिकॉर्ड; जलस्रोत भरे, रबी किसानों के चेहरे खिले
सभी नियमों का पालन पाए जाने पर ही भोगवटा प्रमाणपत्र यानी ऑक्युपेसी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, बीते दस महीनों में शहर की 467 इमारती को भोगवटा प्रमाणपत्र प्रदान किए गए है