मेयर पद खुला: संभाजीनगर में भाजपा के भीतर दावेदारों की बाढ़, सामान्य वर्ग आरक्षण; सत्ता की नई राजनीति शुरू
Mayor Reservation: मेयर पद को सामान्य वर्ग के लिए खुला किए जाने से संभाजीनगर की राजनीति गरमा गई है। भाजपा में अब कई दावेदार सामने आ रहे हैं और नेतृत्व चयन रणनीतिक बन गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
Municipal Politics Hindi News: छत्रपति संभाजीनगर शहर के मेयर पद को लेकर तस्वीर साफ होते ही शहर की राजनीति नए मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य सरकार के नगर विकास विभाग द्वारा मेयर पद को सामान्य यानी खुले वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने से यह तय हो गया है कि अगले पांच वर्षों तक शहर की सत्ता किस दिशा में जाएगी। हालांकि सत्ता पर काबिज दल स्पष्ट है, लेकिन नेतृत्व का चेहरा और राजनीति की शैली अभी तय होना बाकी है।
खुला वर्ग, खुली दौड़; मेयर पद के खुला होने का सबसे बड़ा राजनीतिक असर भाजपा के अंदर देखने को मिल रहा है। महिला आरक्षण या किसी विशेष प्रवर्ग का बंधन न होने से पुरुष और महिला दोनों पार्षदों के लिए रास्ता खुल गया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि पार्टी के भीतर दावेदारों की संख्या अचानक बढ़ गई है। अब यह केवल लोकप्रियता का नहीं, बल्कि संगठन। अनुभव। सामाजिक संतुलन और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति का मामला बन गया है।
अनुभवी बनाम नया चेहरा
भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह किसी अनुभवी नगरसेवक को मेयर बनाकर प्रशासनिक स्थिरता का संदेश दे या फिर नए चेहरे, खासकर महिला नेतृत्व को आगे लाकर सामाजिक और राजनीतिक संकेत दे। यदि अनुभवी चेहरे को मौका मिलता है तो मनपा की कार्यप्रणाली में तेजी और नियंत्रण पर जोर रहेगा। वहीं नया या महिला चेहरा चुना गया तो यह भाजपा की भविष्य की राजनीतिक ब्रांडिंग का हिस्सा माना जाएगा।
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मेयर पद के इच्छुक नगरसेवक
महेश मालवतकर, समीर राजूरकर, सुरेंद्र कुलकर्णी, राजगौरव वानखेडे, विजय औताडे, गणेश नावंदर, रामेश्वर भादवे, शिवाजी दांडगे, सुनील जगताप, रेणुकादास (राजू) वैद्य, अप्पासाहेब हिवाले।
महिला में अर्चना चौधरी, एड। माधुरी अदवंत, मोहिनी गायकवाड, अनिता मानकापे, सुवर्णलता पाटील, ज्योति जैन, सुमित्रा मात्रे, सत्यभामा शिंदे, सुनीता सालुके, मुक्ता दुबे, सविता कुलकर्णी, प्रियंका खोतकर।
अनुभवी बनाम नया चेहरा
भाजपा के सामने रणनीतिक सवाल है। क्या किसी अनुभवी नगरसेवक को मेयर बनाकर प्रशासनिक मजबूती और स्थिरता का संदेश दिया जाए। या फिर नया अथवा महिला चेहरा आगे लाकर सामाजिक और राजनीतिक संकेत दिया जाए। महिला मेयर का चयन होने पर भाजपा को शहरी और सामाजिक स्तर पर सकारात्मक संदेश देने का अवसर मिल सकता है।
विपक्ष की रणनीति भी अहम
हालांकि मेयर भाजपा का ही होगा, लेकिन विपक्ष की भूमिका हल्की नहीं रहेगी। एमआईएम के साथ शिवसेना और अन्य दल मनपा को राजनीतिक संघर्ष का मंच बनाने की तैयारी में है। प्रशासनिक फैसलों पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने रहेंगे। इससे मनपा आमसभा की हर बैठक राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन सकती है।
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अगला चरण निर्णायकः मेयर पद के साथ डिप्टी मेयर, स्थायी समिति अध्यक्ष और अन्य समितियों के गठन से वास्तविक सत्ता संतुलन तय होगा। यही वे पद हैं, जिनसे आर्थिक और नीतिगत फैसलों पर सीधा नियंत्रण रहता है, इसलिए आने वाले कुछ दिन केवल नामों की घोषणा नहीं। बल्कि शहर की राजनीतिक दिशा तय करने वाले साबित होंगे।
ऐसी है मनपा में दलीय स्थिति
महानगरपालिका चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी ने 57 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। ऐसे में मेयर पद भाजपा के पास ही रहेगा। इसमें किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर की संभावना फिलहाल नहीं दिखती। इसके उलट ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 33 पार्षदों के साथ मजबूत विपक्ष की भूमिका में आने से सदन की राजनीति केवल औपचारिक नहीं रहने वाली। आक्रामक बहसे और टकराव तय माने जा रहे हैं।
