मीरा भाईंदर मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mira Bhayandar Street Vendors Committee Issue: फेरीवालों के पुनर्वास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए गठित मीरा-भाईंदर की स्ट्रीट वेंडर्स कमेटी आज भी सरकारी अधिसूचना के इंतजार में अटकी हुई है। राज्य सरकार की मंजूरी न मिलने से यह समिति केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है।
इस बीच मनपा प्रशासन द्वारा फेरीवालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई किए जाने से उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है। बता दें कि केंद्र सरकार के स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण एवं स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) नियम, 2016 के तहत मीरा-भाईंदर मनपा ने 30 मई 2025 को 20 सदस्यीय स्ट्रीट वेंडर्स कमेटी के लिए चुनाव कराया था।
इस समिति का उद्देश्य शहर के फेरीवालों का सर्वेक्षण, पुनर्वास और उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है। हालांकि चुनाव होने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से समिति के गठन की अधिसूचना जारी नहीं की गई है, जिससे समिति का कामकाज शुरू नहीं हो पाया है।
मनपा ने शहर में 8,528 फेरीवालों का सर्वेक्षण पूरा करने का दावा किया है। हालांकि, कई फेरीवालों का आरोप है कि सर्वे में कुछ फर्जी लोगों को शामिल किया गया, जबकि कई नगरपालिका वास्तविक फेरीवाले इससे बाहर रह गए।
इसके अलावा समिति में सरकार के विभिन्न विभागों के 5 अधिकारियों को शामिल किया गया है, जबकि मनपा आयुक्त को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति के गठन के बाद इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित करना अनिवार्य था।
इसके लिए मनपा ने 15 सितंबर 2025 को प्रशासनिक बैठक में प्रस्ताव पारित किया और 18 सितंबर 2025 को यह प्रस्ताव राज्य के शहरी विकास विभाग को मंजूरी के लिए भेज दिया, लेकिन करीब 6 महीने बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार से मंजूरी नहीं मिली है, जिससे समिति का मामला सरकारी प्रक्रिया में उलझा हुआ नजर आ रहा है।
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इसी बीच, पिछले महीने समिति के निर्वाचित सदस्यों ने मनपा आयुक्त से मुलाकात कर समिति के कामकाज के बारे में जानकारी ली। उस समय उन्हें बताया गया कि अभी तक सरकार की ओर से अधिसूचना जारी नहीं हुई है। फेरीवालों का कहना है कि जब तक समिति की नीति को अंतिम रूप नहीं दिया जाता, तब तक उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
मीरा भाईंदर से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट