हाईकोर्ट का निर्देश: APAAR ID पर बॉम्बे हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, संस्था सहयोग करे, दबाव नहीं

Bombay High Court: प्राथमिक शिक्षा छात्रों का संवैधानिक अधिकार है और इसके लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य नहीं किया जा सकता-बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ की अहम टिप्पणी।
High Court's directive: Bombay High Court makes important remarks on APAAR ID, instructs institutions to cooperate, not exert pressure
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Constitutional Right: छत्रपति संभाजीनगर प्राथमिक शिक्षा छात्रों का संवैधानिक अधिकार है व इसके लिए उनके आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य नहीं किया जा सकता। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने रामराव नाईक संस्था को आधार प्रमाणीकरण प्रक्रिया में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य में सभी छात्रों का अपार आईडी (APAAR ID) यू-डायस प्लस प्रणाली के माध्यम से तैयार करने को लेकर जिला परिषद के शिक्षा अधिकारी सरकारी निर्णय के अनुसार सख्ती बरत रहे थे।

हालांकि, इस प्रणाली में छात्रों के नाम आधार कार्ड से जोड़ते। समय आधार में मौजूद खामियों के चलते कई तकनीकी व प्रशासनिक समस्याएं सामने आ रही हैं। इसे देखते हुए परभणी जिले के सोनपेठ स्थित रामराव नाईक बहुउद्देशीय सेवाभावी संस्था ने आधार लिंकिंग प्रक्रिया के लिए समय-सीमा बढ़ाने की मांग जिला परिषद से की थी।

प्रशासनिक कामकाज पर दबाव

सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि राज्य में वर्तमान में लाखों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यही नहीं, छात्रवृत्ति, मध्याहन भोजन योजना, निःशुल्क ड्रेस, पाठ्यपुस्तक वितरण, समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं के लिए आधार की जरूरत पड़ती है, मगर आधार पंजीकरण प्रक्रिया में समय लगने के चलते शिक्षा संस्थानों के प्रशासनिक कामकाज पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

सभी पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि प्राथमिक शिक्षा से किसी भी छात्र को वंचित नहीं किया जा सकता व आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने संबंधित संस्थाओं को इस प्रक्रिया में यथासंभव सहयोग करने के निर्देश भी दिए हैं।

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