अजंता गुफाएं की बदहाल व्यवस्था पर यूएन अधिकारी की नाराजगी, कहा-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि हो रही खराब
Ajanta Caves Management Issues: अजंता गुफाएं के दौरे के दौरान संयुक्त राष्ट्र के भारत में निवासी समन्वयक स्टीफन प्रेसनर ने परिसर में अव्यवस्था, कचरा व बुनियादी सुविधाओं की कमी पर नाराजगी जताई।
- Written By: अंकिता पटेल
Sambhajinagar Tourism Infrastructure Ajanta( Source: Social Media )
Sambhajinagar Tourism Infrastructure Ajanta: छत्रपति संभाजीनगर विश्व धरोहर स्थल अजंता गुफाएं की बदहाल व्यवस्था को लेकर संयुक्त राष्ट्र के भारत में निवासी समन्वयक स्टीफन प्रेसनर ने नाराजगी जताई है।
उन्होंने कहा कि यहां की अव्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब हो रही है। स्टीफन अपने परिवार के साथ जिले के विभिन्न विश्व धरोहर स्थलों के दौरे पर हैं, इसी क्रम में उन्होंने अजंता का दौरा किया।
इस दौरान उन्होंने गुफा प्रशासन के साथ वहां की व्यवस्थाओं, समस्याओं व चुनौतियों पर चर्चा की। मौके पर क्यूरेटर मनोज पवार, पर्यटक गाइड डॉ. सुभाष जाधव व अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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स्टीफन ने परिसर में टूटी हुई सीढ़ियां, जगह-जगह फैला कचरा व प्लास्टिक की बोतलें देखकर नाराजगी व्यक्त की। साथ ही व्यू पॉइंट के पास शौचालय, बाथरूम व छाया जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी उनके ध्यान में आया।
गुफाओं के पास के गांव से -गुजरते समय उन्होंने देखा कि कुछ वाहन चालक सड़क किनारे ही गाड़ियां खड़ी कर खुले में लघुशंका कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यातायात बाधित होने से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को परेशानी होती है। उन्होंने नाराजगी जताई, लेकिन वन क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद भी लिया।
74 स्मारकों की देखरेख पर की गई गहन चर्चा
अजंता घाट क्षेत्र में भारी टैफिक जाम के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, स्थिति ऐसी रही धूध व्यू तक दौरान उन्हें रास्ते में प्लास्टिक कचरा, बोतलें और टूटे हुए रेलिंग व सीदिया दिखाई दीं।
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इन सब पर उन्होंने बन विभाग व संबंधित एजेंसियों के रखरखाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाती है इस दौरान गुफाओं की संरक्षा, चित्रों की स्थिति व बारिश के दौरान होने वाले सभावित नुकसान पर भी वर्ष की गई।
पुरातश्चिक प्रबंधन के प्रमुख डॉ. शिवकुमार भगत ने बताया कि संभाजीनगर सर्वल में कुल 74 संरक्षित स्मारक शामिल है, जिनकी देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित विभागों पर है।
