

Anand Paranjpe Rejoins Shiv Sena: महाराष्ट्र की राजनीति में रोज नए फेर बदल देखने को मिल रहे हैं। एनसीपी अजित पवार गुट के मुख्य प्रवक्ता एवं पूर्व सांसद आनंद परांजपे गुरुवार को शिवसेना शिंदे गुट में शामिल हो गए। गुरुवार को ही आनंद परांजपे ने सुनेत्रा पवार को लिखे पत्र में पार्टी के सभी पदों सहित अपनी सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद शिवसेना में शामिल हो गए। देर शाम शिवसेना के पार्टी कार्यालय बालासाहब भवन में आनंद परांजपे पहुंचे और शिवसेना संसदीय दल के नेता डॉ श्रीकांत शिंदे एवं अन्य नेताओं की उपस्थिति में घर वापसी की घोषणा की। सांसद डॉ श्रीकांत शिंदे ने आनंद परांजपे को भगवा ध्वज थमाते हुए उनका स्वागत किया। इस दौरान डॉ श्रीकांत शिंदे ने कहा कि आनंद परांजपे मूल रूप से शिवसैनिक ही रहे हैं। शिवसेना के मुख्य नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में दो बार शिवसेना के सांसद भी हुए। एक तरह से आनंद परांजपे की घर वापसी ही हुई है।
उल्लेखनीय है कि आनंद परांजपे के पिता स्व.प्रकाश परांजपे 1996 में पहली बार ठाणे से शिवसेना के सांसद बने थे। उस समय स्व.आनंद दिघे के कट्टर समर्थक माने जाने वाले प्रकाश परांजपे लगातार 4 बार शिवसेना के सांसद हुए। वर्ष 2007 में हुई उनकी आकस्मिक मौत के बाद उनके पुत्र आनंद परांजपे सीधे राजनीति में प्रवेश करते हुए उपचुनाव में सांसद बने। 2007 एवं 2009 में लोकसभा चुनाव में आनंद परांजपे की जीत में शिवसेना के तत्कालीन जिला प्रमुख एवं मौजूदा डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का बड़ा योगदान रहा। वर्ष 2012 में सांसद रहते आनंद परांजपे अचानक शिवसेना छोड़ कर शरद पवार की एनसीपी में शामिल हो गए। परांजपे ने एनसीपी के टिकट पर दो बार लोकसभा का चुनाव भी लड़ा लेकिन सफल नहीं हुए। एनसीपी टूटने के बाद अजित पवार की पार्टी में शामिल आंनद परांजपे मुख्य प्रवक्ता,प्रदेश महासचिव सहित संगठन में कई अहम पदों पर कार्य कर रहे थे।
गुरुवार को शिवसेना में शामिल होने के बाद पूर्व सांसद आनंद परांजपे ने एनसीपी को धन्यवाद देते हुए कहा कि मेरी कोई नाराजगी नहीं है। एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ही नहीं बल्कि शरद पवार एवं जितेंद्र आव्हाड को भी परांजपे ने धन्यवाद दिया। किसी नाराजगी में एनसीपी छोड़ने के सवाल पर परांजपे ने कहा कि उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है।
समझा जाता है कि अजित पवार की की मौत के बाद एनसीपी में आनंद परांजपे को कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा था। हालाकिं इस समय शिवसेना में शामिल होने के सवाल पर पूर्व सांसद आनंद परांजपे ने कहा कि उन्हें किसी पद की लालसा नहीं है। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे एवं सांसद डॉ श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं। पूर्व सांसद परांजपे के शिवसेना में प्रवेश पर डॉ श्रीकांत शिंदे ने कहा कि आनंद परांजपे के संगठन कौशल का सही उपयोग शिवसेना में होगा,क्योंकि उनके डीएनए में ही शिवसेना है।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले भी आनंद परांजपे डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से उनके आधिकारिक आवास नंदनवन पर जाकर मिले थे। तब से कयास लग रहा था कि परांजपे अपनी पुरानी पार्टी शिवसेना में शामिल होंगे।परांजपे लगभग 14 वर्षों तक एनसीपी में रहे। एनसीपी में फूट के बाद उन्हें लगा था कि अजित पवार उन्हें विधानपरिषद या राज्य सभा भेज सकते हैं,परन्तु उनकी आकस्मिक मौत के बाद राज्य के समीकरण बदल गए।
हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में NCP के भीतर मतभेद सामने आए. फाइनल तौर से पार्टी ने जीशान सिद्दीकी को विधान परिषद की सीट दे दी। चर्चा थी कि आनंद परांजपे नाराज थे। कहा जा रहा है कि विधान परिषद और राज्यसभा दोनों चुनावों में पार्टी की ओर से नजरअंदाज किए जाने से परांजपे ने एनसीपी छोड़ कर घर वापसी का फैसला लिया।