‘ऐसे कार्ड पाकिस्तान में…’, शादी के कार्ड पर टीपू सुल्तान के साथ शिवाजी महाराज का नाम देख भड़के नितेश राणे
Nitesh Rane on Amravati Wedding Card: शादी के कार्ड पर शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान का नाम देख नितेश राणे भड़के। कहा- ऐसे कार्ड पाकिस्तान में छपवाते तो ज्यादा अच्छा होता।
- Written By: अनिल सिंह
शादी के कार्ड पर टीपू सुल्तान का जिक्र देख मंत्री नितेश राणे का तीखा हमला (फोटो क्रेडिट-X)
Nitesh Rane on Wedding Card Tipu Sultan: अमरावती के वलगांव में रहने वाले एक मुस्लिम युवक, जो हिंदू-मुस्लिम कौमी एकता मंच से जुड़ा है, उसके विवाह का निमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कार्ड में हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान का नाम एक साथ प्रेरणास्रोत के रूप में छापा गया है। युवक का तर्क है कि दोनों ही शासकों ने सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया था, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पर तीखी बहस छिड़ गई है।
विवाद तब और गहरा गया जब भाजपा के कद्दावर नेता और मंत्री नितेश राणे ने इस पर अपनी आक्रामक प्रतिक्रिया दी। राणे ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र और हिंदू राष्ट्र में टीपू सुल्तान जैसे शासक को शिवाजी महाराज के समकक्ष रखना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पाकिस्तान में छपवाते तो ज्यादा उचित होता
मंत्री नितेश राणे ने कार्ड पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जिस टीपू सुल्तान ने बड़े पैमाने पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया और हमेशा नफरत की राजनीति की, उसे महाराष्ट्र में सम्मान नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि इस तरह के कार्ड पाकिस्तान में छपवाए गए होते, तो शायद वे वहां स्वीकार्य होते, लेकिन भारत के हिंदू राष्ट्र में ऐसी बातें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
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कार्ड में दिए गए ऐतिहासिक तर्क
विवादित कार्ड में यह उल्लेख किया गया है कि टीपू सुल्तान ने 156 मंदिरों को भूमि दान की थी और काशी के मंदिरों के लिए सोने के सिक्के दिए थे। दूसरी ओर, इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के उदारवादी दृष्टिकोण का हवाला देते हुए बताया गया है कि उन्होंने रायगढ़ में मंदिर के साथ मस्जिद का निर्माण कराया था और रत्नागिरी में दरगाह के लिए भूमि दान की थी। कार्ड के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि इतिहास के महापुरुषों ने एकता का मार्ग दिखाया था।
प्रगतिशील बनाम हिंदुत्ववादी विचारधारा
जहाँ एक तरफ राज्य के प्रगतिशील विचारकों ने इस पहल को कौमी एकता की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया है, वहीं हिंदुत्ववादी संगठन इसे भावनाओं को आहत करने वाला कदम मान रहे हैं। नितेश राणे के इस बयान के बाद अमरावती और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की नजर सोशल मीडिया पर बढ़ते इस विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर टिकी हुई है।
