'कांग्रेस है महिला हितों के खिलाफ', सिंधुदुर्ग में नितेश राणे ने 'नारी शक्ति बिल' को लेकर विपक्ष को घेरा

Nitesh Rane Sindhudurg Visit: नितेश राणे ने नारी शक्ति बिल को लेकर कांग्रेस को घेरा। कहा- मोदी सरकार महिलाओं को सशक्त कर रही, कांग्रेस कर रही विरोध।
Nitesh Rane Reaction on congress
नितेश राणे का बड़ा बयान, 'लाडकी बहिन' से 'तीन तलाक' तक कांग्रेस ने हर जगह किया विरोध
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Nitesh Rane Sindhudurg Congress: सिंधुदुर्ग के दौरे पर आए भाजपा विधायक और कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने मीडिया से संवाद करते हुए केंद्र की मोदी सरकार द्वारा महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों को क्रांतिकारी बताया। उन्होंने विशेष रूप से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (106वां संविधान संशोधन) का जिक्र किया। राणे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन महिलाओं को विधायिकाओं में नेतृत्व की भूमिका प्रदान करना है, लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस लगातार इसमें बाधाएं उत्पन्न कर रहा है।

गौर करने वाली बात है कि सितंबर 2023 में पारित हुए इस अधिनियम को लागू करने के लिए पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने की शर्त रखी गई थी। हालांकि, अब सरकार इन तकनीकी शर्तों को हटाकर इसे सीधे तौर पर लागू करने में जुट गई है। 16 अप्रैल 2026 से केंद्र सरकार ने इस कानून को लागू कर दिया है और इसे जनगणना व परिसीमन से अलग करने की प्रक्रिया पर काम शुरू हो चुका है, ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द से जल्द 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सके।

"कांग्रेस ने हर महिला हितैषी फैसले का किया विरोध"

नितेश राणे ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जब भी केंद्र या राज्य सरकार महिलाओं के विकास के लिए कोई योजना लाती है, कांग्रेस उसका विरोध शुरू कर देती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब मोदी सरकार तीन तलाक के खिलाफ ऐतिहासिक विधेयक लाई थी, तब भी कांग्रेस उसके खिलाफ खड़ी थी।

राज्य की योजनाओं पर भी राजनीति

राणे ने महाराष्ट्र सरकार की 'मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना' का संदर्भ देते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लाई गई इस जनहितैषी योजना का भी कांग्रेस ने विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल राजनीति के लिए महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है।

महिला सशक्तिकरण और भविष्य की दिशा

नितेश राणे के अनुसार, कांग्रेस की यह मानसिकता दर्शाती है कि वह महिलाओं के सामाजिक और राजनीतिक उत्थान के विरुद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि परिसीमन की शर्तों को हटाकर सरकार महिलाओं को उनका हक देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे देश के लोकतंत्र में नारी शक्ति की भागीदारी और भी मजबूत होगी।

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