

Ashok Kharat Case Update: नासिक के लॉजिस्टिक्स व्यवसायी राजेंद्र अशोक जासूद को अपने व्यापार को वैश्विक स्तर पर ले जाने की इच्छा थी, जिसे अशोक खरात ने ठगी का हथियार बना लिया। खरात ने जासूद को विश्वास दिलाया कि इसके लिए 'अवतार पूजा' अनिवार्य है और उन्हें ईशान्येश्वर मंदिर सहित तीन अलग-अलग देशों की यात्रा करनी होगी। इसी प्रक्रिया के दौरान खरात ने जासूद के मन में अंधविश्वास और डर पैदा करने के लिए एक नकली सांप का सहारा लिया।
जांच में यह बात सामने आई है कि पूजा के दौरान सांप दिखाकर खरात ने जासूद को मानसिक रूप से इतना डरा दिया कि वह उसकी हर बात मानने को मजबूर हो गए। खरात ने उन्हें सीधे तौर पर धमकी दी थी कि यदि उन्होंने बताई गई 'अवतार पूजा' और धन का लेन-देन नहीं किया, तो उनकी मृत्यु निश्चित है। इस भय का लाभ उठाकर आरोपी ने व्यवसायी से कुल 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ऐंठ ली।
सुनवाई के दौरान सरकारी अभियोजकों ने अदालत को बताया कि यह केवल वित्तीय धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि जान से मारने की धमकी देकर की गई उगाही है। सरकारी पक्ष ने सवाल उठाया कि ईशान्येश्वर मंदिर में किस प्रकार की संदिग्ध पूजा आयोजित की जा रही थी और जासूद से लिए गए 5 करोड़ रुपये आखिर कहाँ खर्च किए गए? इन सभी कड़ियों को जोड़ने और पैसों के लेन-देन का पता लगाने के लिए पुलिस ने आरोपी की पाँच दिन की हिरासत मांगी थी।
दूसरी ओर, अशोक खरात के वकीलों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया कि खरात ने स्वयं पहले वावी पुलिस स्टेशन में जासूद और अन्य के खिलाफ फिरौती का मामला दर्ज कराया था। बचाव पक्ष के अनुसार, जासूजी कैमरे के जरिए वीडियो रिकॉर्ड करने वाले नीरज जाधव ने दिनेश परब को वीडियो दिए थे, जिसके आधार पर अब खरात को फंसाया जा रहा है। वकीलों ने तर्क दिया कि जासूद द्वारा कार उपहार में दी गई थी और यात्राएं आपसी समझौते के तहत की गई थीं।
दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अशोक खरात को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया। SIT (विशेष जांच दल) अब खरात के डिजिटल फुटप्रिंट्स, बैंक खातों और उसके संपर्क में रहे अन्य संदिग्धों की जांच करेगी। पुलिस को संदेह है कि खरात ने इसी तरह के 'अवतार' और 'पूजा' के ढोंग से कई अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है।