

Amravati Mosambi Farmers: अमरावती जिले के वरुड तहसील के बेलोरा, आलोडा, पलसवाड़ा, नांदगांव और हातूर्णा क्षेत्र के मौसंबी उत्पादक किसान इन दिनों जंगली तोतों के बढ़ते हमलों से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि हजारों की संख्या में झुंड बनाकर आने वाले तोते पके हुए मौसंबी फलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है।
किसानों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र के किसानों ने संतरे की जगह मौसंबी की खेती को प्रमुख नकदी फसल के रूप में अपनाया है। बेहतर आय की उम्मीद में बागानों का रकबा लगातार बढ़ा, जबकि कपास, तूर और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों का रकबा घट गया।
इस वर्ष स्थिति और गंभीर हो गई है। किसानों का दावा है कि जंगली तोते बड़ी संख्या में बागानों में डेरा डाले हुए हैं और पके फलों को चोंच मारकर गिरा रहे हैं। कई बागानों में प्रत्येक पेड़ के नीचे 50 से 100 तक खराब हुए फल पड़े दिखाई दे रहे हैं।तोतों को भगाने के लिए किसान सुबह से शाम तक पटाखे फोड़ने, डफ बजाने और रिकॉर्डेड आवाजें चलाने जैसे उपाय कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका उपद्रव कम नहीं हो रहा है।
इससे किसानों की अन्य कृषि गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं और पूरे समय बागानों की निगरानी करनी पड़ रही है। किसानों ने मांग की है कि कृषि विभाग और वन विभाग संयुक्त रूप से नुकसान का सर्वे करें, प्रभावी उपाय लागू करें तथा प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए।
आंबिया बहार की मौसंबी अगस्त-सितंबर में तुड़ाई के लिए तैयार होती है। दिसंबर से ही किसान सिंचाई, खाद, दवाइयों और रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च करता है। लेकिन फसल तैयार होने के अंतिम चरण में जंगली तोते फलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यदि समय रहते उपाय नहीं किए गए तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।