अमरावती के आदिवासी छात्रावास में भूत-प्रेत की अफवाह से हड़कंप! 600 आदिवासी छात्रों ने छोड़ा स्कूल

Amravati Tribal Hostel: अमरावती के डोमा गांव स्थित आदिवासी आवासीय विद्यालय में चार छात्राओं के अजीब व्यवहार के बाद भूत-प्रेत की अफवाह फैल गई। इसके चलते करीब 600 विद्यार्थियों ने छात्रावास छोड़ दिया।
Rumors of a haunted hostel spark panic in Amravati; 600 students move out
भूतिया छात्रावास की अफवाह से अमरावती में हड़कंप, 600 छात्र बाहरप्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
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Amravati Hostel Tribal Students: अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में स्थित एक सरकारी आवासीय विद्यालय का छात्रावास इन दिनों चर्चा में है। डोमा गांव स्थित आदिवासी विकास विभाग के आवासीय विद्यालय में कुछ छात्राओं के अचानक असामान्य व्यवहार करने के बाद ‘भूत-प्रेत के साये’ की अफवाह फैल गई, जिसके चलते करीब 600 विद्यार्थी छात्रावास छोड़कर चले गए। प्रशासन अब इस पूरे मामले को अंधविश्वास के बजाय मानसिक तनाव और मनोवैज्ञानिक स्थिति से जोड़कर देख रहा है।

चिखलदरा तहसील के आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित इस आवासीय विद्यालय में करीब 810 छात्र-छात्राएं रहते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, घटना की शुरुआत 22 जुलाई को हुई, जब चार छात्राओं ने अचानक असामान्य व्यवहार करना शुरू किया। वे कभी अनियंत्रित होकर रोने तो कभी हंसने लगीं। इसके बाद छात्रावास में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

चार छात्राओं के व्यवहार से शुरू हुआ मामला

प्रशासन के अनुसार, 22 जुलाई को चार छात्राओं में अचानक इस तरह के लक्षण दिखाई दिए। उनके व्यवहार को देखकर अन्य विद्यार्थियों में भी डर का माहौल बन गया। कुछ छात्राओं ने कथित तौर पर घुंघरुओं जैसी आवाजें सुनाई देने की बात भी कही।

घटना की चर्चा छात्रावास में तेजी से फैलती गई और देखते ही देखते यह धारणा बनने लगी कि कुछ छात्राओं पर किसी ‘ऊपरी साये’ का असर है। इसके बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी डर गए और अपने घर लौटने लगे।

कुछ ही दिनों में 600 विद्यार्थियों ने छोड़ा छात्रावास

अधिकारियों के मुताबिक, छात्रावास में रहने वाले करीब 810 विद्यार्थियों में से लगभग 600 विद्यार्थी परिसर छोड़ चुके हैं। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती विद्यार्थियों के बीच फैले डर और अफवाह को दूर करना है। प्रशासन का कहना है कि इस घटना को अंधविश्वास से जोड़ने के बजाय वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम ने किया दौरा

मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम ने डोमा स्थित आवासीय विद्यालय का दौरा किया। अधिकारियों के अनुसार, विशेषज्ञों ने छात्राओं की स्थिति और घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली।

प्रारंभिक स्तर पर प्रशासन को आशंका है कि छात्राओं में दिखाई दिए लक्षण मानसिक तनाव से जुड़ी ‘हिस्टीरिया जैसी स्थिति’ का परिणाम हो सकते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे इन घटनाओं को किसी अलौकिक गतिविधि से जोड़ा जा सके।

अफवाहों ने बढ़ाया डर

प्रशासन द्वारा तैयार मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ छात्राओं के असामान्य व्यवहार के बाद छात्रावास में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। एक घटना के बाद दूसरी छात्राओं के बीच भी डर और तनाव बढ़ता गया।

ऐसी परिस्थितियों में सामूहिक भय और मानसिक दबाव के कारण कुछ लोगों में समान तरह के शारीरिक या व्यवहार संबंधी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। प्रशासन इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रहा है।

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अंधविश्वास नहीं, वैज्ञानिक जांच पर जोर

अधिकारियों ने कहा है कि छात्राओं के व्यवहार को ‘भूत-प्रेत’ या किसी अलौकिक घटना से जोड़ना उचित नहीं है। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को भी अफवाहों पर भरोसा न करने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि विद्यार्थियों में विश्वास बहाल किया जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श और स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जाए।

अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

डोमा आवासीय विद्यालय की घटना ने प्रशासन के सामने दो अहम चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पहली, छात्राओं में दिखाई दिए असामान्य व्यवहार के वास्तविक कारण का पता लगाना और दूसरी, करीब 600 विद्यार्थियों के बीच फैले डर को दूर कर उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय और मनोवैज्ञानिक आकलन के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन ने संकेत दिया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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