किसानों को मिर्च फसल का भारी उत्पादन, खर्च ज़्यादा, लेकिन आमदनी संतोषजनक
Amravati district: मेलघाट की तलहटी समेत पूर्णा नदी के किनारे के इलाकों में मिर्च किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जून और जुलाई के महीनों में बोई जाने के बाद मिर्च अब कटाई के लिए तैयार हो गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
किसानों को मिर्च फसल का भारी उत्पादन (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Amravati News: अमरावती ज़िले में हर जगह हरी मिर्च का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। मेलघाट की तलहटी समेत पूर्णा नदी के किनारे के इलाकों में मिर्च किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जून और जुलाई के महीनों में बोई जाने के बाद मिर्च अब कटाई के लिए तैयार हो गई है। अक्टूबर से जनवरी के बीच मिर्च हर दिन किसानों के हाथों में कमाई लाती रहती है। खास बात यह है कि सिर्फ़ चार-पांच महीने ही नहीं, बल्कि बोने के बाद पूरे साल होने वाली मिर्च की पैदावार किसानों के लिए वरदान है।
चांदुरबाजार तालुका के पूर्णा नगर के युवा किसान निखिल राउत ने बताया कि मिर्च की खेती लाभदायक है, लेकिन मिर्च लगाना, पेड़ों पर लगातार दवा छिड़कना और खाद डालना, ये सब मेहनत और महंगा काम है। मिर्च तोड़ने के लिए खेत में कुल 16 महिला मजदूर हैं। प्रत्येक को 200 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है। एक महिला एक दिन में पंद्रह से सोलह किलो मिर्च तोड़ती है।
प्रतिदिन पांच क्विंटल मिर्च की पैदावार
कुल साढ़े तीन एकड़ खेत में मिर्च लगाई गई है। पहली बार मिर्च की कटाई हुई है। चौथा-पांचवां तोड़ा हो चुका है। जब शुरुआती एक-दो तोड़ा हुआ था, तब प्रति किलो कीमत मात्र 10 से 20 रुपये थी। अब 35 से 28 रुपये तक कीमत मिल रही है। अभी खेत में चार से पांच क्विंटल मिर्च की कटाई हो रही है। हालांकि खाद, दवा और मजदूरी का खर्चा ज्यादा है, लेकिन मिर्च की पैदावार संतोषजनक है। अब अगले बारह महीने मिर्च की कटाई जारी रहेगी, जिससे अच्छा उत्पन्न होगा, ऐसी उम्मीद निखिल राउत ने जताई।
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बारिश का असर नहीं, पर कोहरे का डर
अभी कभी-कभार बारिश हो रही है। मिर्च को बारिश का डर नहीं है। लेकिन अगर बादल छा गए और कोहरा पड़ गया, तो मिर्च की फसल जलने का डर है, ऐसा निखिल राउत ने कहा।
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मुंबई, दिल्ली और कोलकाता के बाजारों में मांग
अमरावती जिले के मेलघाट की तलहटी में स्थित धामणगांव गढ़ी, देवगांव, मलहारा में उच्च गुणवत्ता वाली मिर्च का उत्पादन होता है। वरुड, चांदूर बाजार तालुका की मिर्च की मुंबई, दिल्ली और कोलकाता के बाजारों में अच्छी मांग है। शुरुआत में इस क्षेत्र में हरी मिर्च की कटाई की जाती है और अंतिम चरण में लाल मिर्च की कटाई की जाती है।
देश के विभिन्न हिस्सों में सूखी लाल मिर्च की अच्छी मांग है। वरुड तालुका के राजुरा बाजार गांव में हर शाम 7 बजे मिर्च का बाजार लगता है। देश के विभिन्न हिस्सों से व्यापारी इस बाजार में आते हैं, जो पूरी रात चलता है। अमरावती जिले की मिर्च पूरे देश में प्रसिद्ध है, ऐसा श्री शिवाजी कृषि महाविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ प्रो। राजेंद्र पाटिल ने बताया।
