Nagpur Forest Division News: देवलापार और आसपास के वन क्षेत्रों में बाल मजदूरी के मामलों ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। तेंदूपत्ता सीजन के दौरान करवाही, छवारी, गोरेघाट और देवलापार क्षेत्र के जंगलों में कटाई-छंटाई के काम में बड़ी संख्या में बच्चों से मजदूरी कराए जाने के आरोप सामने आए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार द्वारा लागू बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 के बावजूद ठेकेदार खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कानून के तहत नाबालिगों से काम करवाने पर 6 महीने से 2 साल तक की सजा का प्रावधान है, फिर भी ग्रामीण इलाकों में यह अवैध प्रथा जारी है।
वन विभाग, नागपुर के उपवनसंरक्षक द्वारा 9 मार्च 2026 को जारी पत्र और 10 मार्च को देवलापार के वन अधिकारियों द्वारा संबंधित ठेकेदार सुगनामल लालचंद (वडनेरा, जिला अमरावती) को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि प्रूनिंग और कॉपीसिंग कार्य में बाल मजदूरों का उपयोग न किया जाए। इसके बावजूद ठेकेदार पर बड़े पैमाने पर बच्चों से काम लेने के आरोप लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित ठेका तत्काल रद्द करने की मांग की है।
इस संबंध में ठेकेदार के मैनेजर मेश्राम से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है।