Gadchiroli News: गड़चिरोली को खेती के लिए सुजलाम सुफलाम जिले के रूप में पहचाना जाता है. लेकिन जिले में किसानों को आवश्यक मात्रा में सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के चलते किसानों को अपनी फसलों पर पानी फेरना पड़ रहा हैं. जिले के किसान खेती पर निर्भर रहते है.
लेकिन सिंचाई सुविधा के अभाव में किसानों को बारहमासी सिंचाई की व्यवस्था नहीं होती है. जिससे जिले में बारहमासी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग पूर्व विधायक रामकृष्ण मडावी ने आयोजित पत्रपरिषद के माध्यम से की.
इस समय पूर्व विधायक मडावी ने कहा कि तुलतुली तथा कारवाफा प्रकल्प वर्ष 1978 से मंजूर होने के बावजूद इस ओर किसी भी राजनेता ने ध्यान नहीं दिया.
लेकिन इस जिले का कच्चा माल ले जाने के लिए करीब 300 कंपनियां जिले में आने का सोच रहे है. जिले में विभिन्न तरह की कंपनी आने से इन कंपनियों को हजारों हेक्टेयर भूमि लगने वाली है.
इस जिले से खनिज ले जाते दिखाई दे रहे है, इसलिए सिंचाई की सुविधा की ओर राज्य कर्ताओं की अनदेखी दिखाई दे रही है. यहां का खनिज ले जाने के लिए 300 कंपनियों की स्पर्धा लगी है. कंपनियों को जगह दिलाने के लिए बाहर के दलाल तैयार हुए है.
जिससे किसान ऐसे दलालों से सतर्क रहकर अपनी जमीन कायम रखने प्रयासरत रहे. जिस समय गड़चिरोली जिले में नक्सलवाद बढ़ गया था, ऐसे समय में वरिष्ठ प्रशासकीय अधिकारी, कर्मचारी गड़चिरोली जिले में आने के लिए कतराते थे.
लेकिन अब बाहरी कंपनियां जिले में किसानों की जमीनें हस्तांतरित कर कंपनियां लगाने के लिए प्रयासरत होने से अब बड़ेबड़े अधिकारी भी जिले में आने के लिए इच्छुक है इसका क्या अर्थ है ऐसा सवाल भी डा. मडावी ने पूछा है.
बांध का निर्माण करें किसानों को बांध तैयार कर दें, तभी किसानों का आय मिलेगी व किसानों की उन्नति होगी. जिले के अन्य प्रकल्प प्रस्तावित है, वह शुरू करें. ऐसी मांग भी पूर्व विधायक डा. रामकृष्ण मडावी ने की.
इस समय पत्रपरिषद में पूर्व सरपंच बुधाजी किरमे, जिला नियोजन समिति की पूर्व सदस्य कल्पना तिजारे, बालाजी बोरकर, सुनील नंदनवार, राकेश बेहरे, भुवनेश्वर सेलोकर समेत राष्ट्रवादी कांग्रेस अजित पवार गुट के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे. 20 जीजीपी 20