अमरावती बेलोरा हवाई अड्डा: 31 मार्च से शुरू होगी नाइट लैंडिंग, DVOR प्रणाली का काम अंतिम चरण में
अमरावती बेलोरा हवाई अड्डे के लिए बड़ी खबर! 31 मार्च से यहाँ नाइट लैंडिंग व टेक-ऑफ की सुविधा शुरू होने जा रही है। हाई-टेक DVOR प्रणाली का 60% काम पूरा हो चुका है, जिससे हवाई सेवा में नया अध्याय जुड़ेगा
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Belora Airport Amravati Night Landing: अमरावती जिले के विकास को नई ऊंचाइयां देने वाले बेलोरा हवाई अड्डे से जुड़ी एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। वर्तमान में इस हवाई अड्डे पर रात के समय विमान संचालन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण उड़ानें केवल दिन के उजाले तक ही सीमित हैं।
हालांकि, महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (MADC) ने पुष्टि की है कि आगामी 31 मार्च 2026 से पहले यहाँ ‘नाइट लैंडिंग’ और ‘नाइट टेक-ऑफ’ की सुविधा पूर्णतः शुरू हो जाएगी। इस कदम से अमरावती का संपर्क अन्य बड़े शहरों से रात के समय भी संभव हो सकेगा।
DVOR प्रणाली का 60 प्रतिशत कार्य संपन्न
हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने वाली आधुनिक ‘डॉप्लर वेरी हाई फ्रिक्वेंसी ओमनी डायरेक्शनल रेंज’ (DVOR) प्रणाली स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना का लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। प्रणाली के लिए आवश्यक ‘सिविल वर्क’ पहले ही संपन्न किया जा चुका है।
विशेष बात यह है कि दो सप्ताह पूर्व नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की एक टीम ने स्थल का निरीक्षण किया था और किए गए निर्माण कार्यों पर संतोष व्यक्त किया है।
इंजीनियरिंग टीम अगले सप्ताह संभालेगी मोर्चा
परियोजना के अगले चरण में, आगामी सप्ताह से DGCA की इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बेलोरा हवाई अड्डे पर डेरा डालेगी। यह टीम एंटीना और अन्य सूक्ष्म उपकरणों की स्थापना का कार्य शुरू करेगी।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, DVOR प्रणाली की स्थापना में अत्यधिक सटीकता और त्रुटिरहित मापन की आवश्यकता होती है, इसलिए इसमें करीब एक से डेढ़ महीने का समय लग सकता है। सभी उपकरणों को लगाने के बाद बार-बार परीक्षण और कैलिब्रेशन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
लाइसेंस और संचालन की अंतिम प्रक्रिया
तकनीकी टीम द्वारा उपकरणों की स्थापना की पुष्टि करने के बाद, वास्तविक ‘फ्लाइट टेस्टिंग’ की जाएगी। इसके पश्चात DGCA की एक उच्च-स्तरीय टीम इस प्रणाली की सटीकता की अंतिम जांच करेगी।
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सभी सुरक्षा मानकों और तकनीकी मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही हवाई अड्डे को रात के संचालन के लिए लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। MADC के अधिकारियों का अनुमान है कि यह पूरी प्रक्रिया अगले दो से ढाई महीने के भीतर संपन्न हो जाएगी, जिससे 31 मार्च की समय सीमा से पहले अमरावती वासियों को नाइट लैंडिंग का उपहार मिल जाएगा।
