अस्पताल में अनाथ छात्रा को अकेला छोड़ने का मामला, स्कूल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
अमरावती के अंजनगांव सुर्जी में एक अनाथ छात्रा को अस्पताल में अकेला छोड़ने के मामले में आवासीय स्कूल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। छात्रा की स्थिति और देखभाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
Anjangaon Surji News: अमरावती जिले के अंजनगांव सुर्जी में एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक अनाथ छात्रा को इलाज के दौरान अस्पताल में अकेला छोड़ दिए जाने से आवासीय स्कूल प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। जानकारी के अनुसार नाबालिग कक्षा 7वीं की छात्रा है, जो अंजनगांवसुर्जी के पांढरी में पढ़ती है। पेट दर्द की शिकायत के चलते उसे ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
बताया जा रहा है कि सोमवार से छात्रा का इलाज जारी है, लेकिन इस दौरान स्कूल की मुख्याध्यापिका या अधीक्षिका ने एक बार भी अस्पताल जाकर उसकी स्थिति का जायजा नहीं लिया। आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने केवल चौकीदार के माध्यम से छात्रा को अस्पताल में भर्ती करवाया और इसके बाद पूरी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
इलाज के दौरान छात्रा की तबीयत और बिगड़ गई तथा उसे खून की उल्टियां होने लगीं, जिससे वह काफी भयभीत हो गई। उसके साथ मौजूद उसकी बुजुर्ग रिश्तेदार शांताबाई इंगले की तबीयत भी बिगड़ गई, जिन्हें भी सलाईन चढ़ानी पड़ी। इस स्थिति में छात्रा पूरी तरह असहाय नजर आई।
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मामले की जानकारी मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ता और भोई संगठन के अध्यक्ष अशोक मोरे अस्पताल पहुंचे और छात्रा की स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान यह सामने आया कि छात्रा पूरी तरह अनाथ है।
जब इस मामले में स्कूल की मुख्याध्यापिका कल्पना हजारे से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कथित रूप से कहा, “छात्रा को अस्पताल में भर्ती कराना ही हमारा काम है, उसके बाद हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं।” इस बयान के बाद स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस घटना ने सरकारी आवासीय स्कूलों में रहने वाले अनाथ और जरूरतमंद बच्चों की सुरक्षा और देखभाल को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।
जांच की जाएगी
- वस्तीगृह के संबंधित अधिकारी की जांच की जाएगी और यदि कोई लापरवाही पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- राजेंद्र जाधव, सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता अधिकारी कोई देखने तक नहीं आया
- बच्ची को अस्पताल में छोड़ दिया गया, कोई देखने तक नहीं आया। मैं भी बीमार पड़ गई हूं, अब उसकी देखभाल कौन करेगा।
शांताबाई इंगले, छात्रा की रिश्तेदार
