साकोली: लाखों के सुलभ शौचालय बदहाल, अनदेखी से योजना ठप; महिलाओं की परेशानी बढ़ी
Bhandara District Local News: साकोली में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सुलभ शौचालय आज बदहाल स्थिति में हैं। प्रशासन की अनदेखी के कारण ये शौचालय अब उपयोग के बजाय उपेक्षा के प्रतीक बन गए हैं।
Administrative Negligence Bhandara News: साकोली शासन द्वारा आम नागरिकों की सुविधा के लिए चलाई जाने वाली योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनका सही तरीके से संचालन और रखरखाव किया जाए। लेकिन साकोली नगर परिषद क्षेत्र में इसका उल्टा उदाहरण सामने आया है, जहां लाखों रुपये की लागत से बनाए गए सुलभ शौचालय आज बदहाली का शिकार हो चुके हैं।
कुछ वर्ष पहले साकोली–सेंदूरवाफा क्षेत्र में प्रति शौचालय लगभग 60 से 70 हजार रुपये खर्च कर रेडीमेड सुलभ शौचालय स्थापित किए गए थे। तत्कालीन मुख्याधिकारी माधुरी मडावी के कार्यकाल में इन्हें शहर के प्रमुख चौकों और सुविधाजनक स्थानों पर लगाया गया था। उस समय नियमित सफाई व्यवस्था और अग्निशमन विभाग द्वारा रोजाना पानी भरने की सुविधा के कारण ये शौचालय महिलाओं और पुरुषों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुए थे।
विशेष रूप से महिलाओं को इससे बड़ी राहत मिली थी और मुख्य मार्गों पर यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए काफी सुविधाजनक बनी थी।
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हालांकि, जैसे ही माधुरी मडावी का तबादला हुआ, स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। कर्मचारियों की लापरवाही और बाद में आए अधिकारियों की अनदेखी के कारण इन शौचालयों की देखरेख पूरी तरह ठप हो गई। इसके बाद आए मुख्याधिकारी रामटेके और वासेकर के कार्यकाल में भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे लाखों रुपये की यह योजना बेकार साबित हो गई।
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कुछ शौचालयों पर “कबाड़ी में बिकने हैं” जैसी लिखावट तक दिखाई देने लगी है, जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है।
एकोडी फाटा से तलाव वार्ड तक बने नए मार्ग के आसपास साप्ताहिक बाजार, दैनिक बाजार, छोटा बस स्टैंड और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थित हैं। ऐसे व्यस्त क्षेत्र में बनाए गए ये शौचालय लोगों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किए गए थे, लेकिन अब ये उपयोग के बजाय उपेक्षा और बदहाली के प्रतीक बन गए हैं।
