Amravati Pagdandi Road Scheme News: राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री बलीराजा पगडंडी सड़क योजना का जोरशोर से ऐलान किया गया है, लेकिन जिले में पुरानी योजनाओं के अधूरे काम अब भी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत 1200 से अधिक पगडंडी सड़कों में से बड़ी संख्या में सड़कें अधूरी पड़ी हैं, जबकि कुछ मामलों में केवल कागजों पर काम पूरा दिखाने के आरोप भी सामने आए हैं।
ग्रामीणों और किसानों में इसको लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि नई योजना शुरू करने से पहले पुरानी योजनाओं के अधूरे कामों की जांच कर उन्हें पूरा किया जाए। पिछले कुछ वर्षों में इन सड़कों के लिए करीब 80 से 100 करोड़ रुपयों का बजट स्वीकृत हुआ, लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थिति संतोषजनक नहीं है।
सरकार ने पहले पालकमंत्री पगडंडी सड़क योजना, बलीराजा पगडंडी सड़क योजना और मातोश्री पगडंडी सड़क योजना के तहत कार्य शुरू किए थे। लेकिन नाम बदलने के बावजूद जमीनी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। अब चौथी बार नई योजना लाने पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
चांदूर बाजार तहसील में करीब 550 सड़कों के पूरा होने का दावा किया गया, लेकिन हकीकत में कई सड़कें अधूरी पाई गईं। कुछ मामलों में 2 किलोमीटर स्वीकृत सड़क के बदले सिर्फ 1 किलोमीटर ही काम हुआ, जबकि पूरा बिल निकाला गया। परसोडादुर्गवाड़ाबेसखेड़ा मार्ग इसका प्रमुख उदाहरण बताया जा रहा है।
2022 में स्वीकृत कुछ सड़कों को 2023 में पूरा दिखाया गया, लेकिन मौके पर केवल आधा काम ही हुआ है। बार-बार शिकायतों के बावजूद जांच नहीं होने से लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
6040 फंडिंग नियम के कारण कई ठेकेदार काम लेने से पीछे हट रहे हैं, जिससे कई परियोजनाएं अटक गई हैं। ऐसे में आगामी बारिश के मौसम में किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्य आंकड़े सूत्रों के अनुसार कुल स्वीकृत सड़कें 1200, स्वीकृत बजट 80-100 करोड़, चांदूर बाजार में दावा 550 सड़कें पूर्ण, अधूरी/आंशिक सड़कें 30 से अधिक। किसानों की मांग तेज, कागजों पर पूरी दिख रही सड़कों की जांच हो, अधूरे कार्य तत्काल पूरे किए जाएं, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो, कार्यों में पारदर्शिता और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
कागजों में सड़कें, जमीन पर परेशानी नई योजनाओं का प्रचार तो हो रहा है, लेकिन पुरानी योजनाओं की अनदेखी से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई सड़कें केवल दस्तावेजों में पूरी हैं, जबकि वास्तविकता में अधूरी हैं। पावस बरसात में हालात और बिगड़ने की आशंका है। ऐसे में किसानों ने सख्त जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।