एंबुलेंस ने कुत्ते को कुचला तो मालिक ने ड्राइवर को पीटा, मरीज को गंवानी पड़ी जान
अकोला में एक 45 वर्षीय मरीज को परिजन एंबुलेंस से अस्पताल ले जा रहे थे। रास्ते में अचानक एक कुत्ता सड़क पार करते समय एंबुलेंस की चपेट में आ गया जिसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि मरिज को भी अपनी जान गवानी पड़ी।
- Written By: आंचल लोखंडे
एंबुलेंस ने कुचल दिया कुत्ते को (सौजन्यः सोशल मीडिया)
अकोला: कभी-कभी एक पल की देरी ज़िंदगी और मौत के बीच की दूरी तय कर देती है। अकोला में हुई एक ऐसी ही दर्दनाक घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। सिर्फ इसलिए कि एक कुत्ता एंबुलेंस से टकराकर मर गया। गुस्से से आगबबूला एक व्यक्ति ने एंबुलेंस को रास्ते में ही रोक दिया, चालक के साथ मारपीट की… और इस बीच एक गंभीर मरीज ने समय पर इलाज न मिलने के कारण दम तोड़ दिया।
घटना अकोला शहर के एक व्यस्त इलाके में घटित हुई। एक 45 वर्षीय मरीज, जिसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी, को परिजन एंबुलेंस से अस्पताल ले जा रहे थे। रास्ते में अचानक एक कुत्ता सड़क पार करते समय एंबुलेंस की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
चालक को पीटा
यह देखकर पास में मौजूद एक व्यक्ति, जो संभवतः उस कुत्ते का देखभालकर्ता था, बेकाबू हो गया। उसने न केवल एंबुलेंस को जबरन रोका, बल्कि चालक को बाहर खींचकर पीटना शुरू कर दिया। उसने वाहन की चाबी भी छीन ली।
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मरीज तड़पता रहा… मदद की आवाज़ भी दबा दी गई
जब चालक के साथ धक्का-मुक्की हो रही थी, उस समय एंबुलेंस के भीतर मरीज दर्द से कराह रहा था। परिजन गिड़गिड़ाते रहे “कृपया पहले अस्पताल चलने दीजिए, उसके बाद जो करना है कीजिए।” लेकिन क्रोध में अंधे उस व्यक्ति के लिए उस मासूम की जान कोई मायने नहीं रखती थी। अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज ने दम तोड़ दिया।
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“उसे बचाया जा सकता था… बस थोड़ी सी इंसानियत चाहिए थी”
मरीज के बेटे ने कहा “पिताजी की हालत गंभीर थी, लेकिन हमारे पास उम्मीद थी। हम समय पर अस्पताल पहुंच सकते थे। पर किसी को एक जानवर की मौत का इतना गुस्सा था कि उसने एक इंसान की ज़िंदगी छीन ली।” इस अमानवीय हरकत के बाद अकोला पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश
चालक के खिलाफ आपातकालीन सेवाओं में बाधा, मारपीट, और लापरवाही से हुई मौत जैसे गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। सामाजिक संगठनों और डॉक्टरों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि, “अगर एंबुलेंस सुरक्षित नहीं है, तो फिर किसी की जान भी सुरक्षित नहीं है।”
जानवर की मौत, इंसान की ज़िंदगी से ज़्यादा अहम
हम सभी को जानवरों के प्रति दया और सहानुभूति होनी चाहिए। लेकिन जब एक गंभीर मरीज जीवन के लिए संघर्ष कर रहा हो, तब हमारी प्राथमिकता इंसान की जान बचाना होनी चाहिए। यह घटना बताती है कि आज हमारा समाज क्रोध में इतना अंधा हो चुका है, कि हम यह भी नहीं सोचते कि हमारी एक ज़िद, किसी का पूरा संसार उजाड़ सकती है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, एक आईना है जो हमें दिखाता है कि संवेदनाएं मरती जा रही हैं।
