अकोला जिले में घटती खेती, पोषण और भूमि के लिए जरूरी दलहन; चना, तुअर और उड़द में गिरावट
Akola News: विश्व दलहन दिवस पर दलहन फसलों के पोषण महत्व को रेखांकित किया गया। कम पानी में उगने वाली ये फसलें प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं, लेकिन जिले में तुअर, मूंग, उड़द की खेती घटती जा रही है।
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
World Pulses Day 2026 News: दलहन फसलें बदलते जलवायु में कम पानी पर भी टिकाऊ रहती हैं और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद करती हैं। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2019 से हर साल 10 फरवरी को विश्व दलहन दिवस घोषित किया है। वर्ष 2026 का घोषवाक्य “भूमि और मानव के पोषण के लिए दलहन” है।
दलहन फसलें प्रोटीन से भरपूर होती हैं और हमारे आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मूंग, मटकी, चना, तुअर, उड़ीद, मसूर, चवली, वाटाणा, सोयाबीन, वाल, राजमा, भरपूर घेवडा, चना दाल और लाच चना जैसे दलहन भारतीय भोजन में लंबे समय से शामिल हैं। खरीफ सीजन में तुअर, मूंग, उड़द, मटकी, राजमा और चवली प्रमुख हैं, जबकि रबी सीजन में चना सबसे महत्वपूर्ण है। जिले में घटती दलहन की खेती जिले में दलहन की खेती लगातार घट रही है।
अस्मानी और सुल्तानी संकटों के कारण किसान नगदी फसलों की ओर झुक रहे हैं, जिससे तुअर, उड़द और मूंग की बुवाई में कमी आई है। हालांकि रबी सीजन का प्रमुख दलहन चना अकोला जिले में संतोषजनक स्तर पर बोया जाता है। इस वर्ष जिले में लगभग 1 लाख 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चुने की बुवाई हुई है। इसके विपरीत तुअर, उड़द और मूंग की खेती में गिरावट दर्ज की गई है।
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शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत
- दलहन शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। विदर्भ क्षेत्र दलहन उत्पादन में हमेशा अग्रणी रहा है। यहां तुअर और चना बड़े पैमाने पर उत्पादित होते हैं।
- डा. पीडीकेवी के वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक डा.वी. एल. गावंडे के अनुसार, दलहन का आहार में अधिकाधिक उपयोग आवश्यक है क्योंकि यह शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है।
- दलहन न केवल मानव पोषण के लिए बल्कि शाश्वत कृषि व्यवस्था के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। इसी महत्व को जनमानस तक पहुंचाने और जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष विश्व दलहन दिवस मनाया जाता है।
