Akola में ओबीसी समाज का आमरण अनशन, बोले- “हमारा हक छीनोगे तो चुप नहीं बैठेंगे”
महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन खत्म होने के बाद एक नई लड़ाई शुरू हो गई है। Akola जिले में OBC Category ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर आमरण आंदोलन की शुरूआत कर दी है, जो धीरे-धीरे जनआंदोलन बनता जा रहा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
ओबीसी समाज का आमरण अनशन (सौ. सोशल मीडिया )
Akola News In Hindi: अकोला जिले में ओबीसी समाज द्वारा आरक्षण की रक्षा के लिए चलाया जा रहा आमरण अनशन आंदोलन अब जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। यह आंदोलन 15 सितंबर से अकोला जिलाधिकारी कार्यालय के सामने शुरू हुआ है, जिसमें ओबीसी समाज के पांच प्रमुख प्रतिनिधि जनार्दन हिरलकर, शंकर पारेकर, पुष्पा गुलवाडे, राजेश ढोमणे और एड। भाऊसाहब मेडशिकर ने आमरण अनशन शुरू किया है।
यह आंदोलन राज्य सरकार द्वारा हैदराबाद गजेटियर लागू कर मराठा समाज को ओबीसी आरक्षण में शामिल करने के विरोध में किया जा रहा है। ओबीसी समाज का कहना है कि यह निर्णय उनके आरक्षण अधिकारों पर सीधा हमला है और इससे ओबीसी वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचेगा। आंदोलनकारियों ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हुए सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है।
ओबीसी समाज अकोला जिला ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस आंदोलन का प्रचार करें और बड़ी संख्या में सहभागी बनें, ताकि सरकार तक उनकी आवाज पहुंच सके और ओबीसी समाज के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। यह आंदोलन राज्य की सामाजिक न्याय व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनता जा रहा है, जिसमें ओबीसी समाज एकजुट होकर अपने हक के लिए संघर्ष कर रहा है। आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संविधानिक मार्ग से चलाया जा रहा है।
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आंदोलनस्थल पर पहुंचकर समर्थन
आंदोलन के दूसरे दिन से ही विभिन्न ओबीसी समाजों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन आंदोलनस्थल पर पहुंचकर समर्थन दे रहे हैं। रामदास तायडे, रमेश वानखडे, राम भारती, विवेक बिजवे, विजय ओहकपुरे, अमोल सातपुते, वैभव कवठेकर, सुधाकर गाडगे, अतुल नवसे, उमेश खोडे, ज्ञानेश्वर बोदडे, विलास करवते, प्रणिता समरीतकर, नंदा बिल्लेवर, माधुरी घनोकार, रमेश इंगले, संतोष सरोदे, गणेश सुरोशे, मधुकर सोनारगण, नंदू बोपुलवार, जगन्नाथ रोठे जैसे अनेक नेताओं ने आंदोलन को अपना समर्थन पत्र देकर मजबूती प्रदान की है।
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अनेक समाजों का समर्थन
इस आंदोलन को ओबीसी वर्ग के अंतर्गत आने वाले अनेक समाजों का समर्थन प्राप्त हुआ है, जिनमें ओतारी, डोबारी, लभाणी, वेरड, रामोशी, मन्नेवार, बागवान, कोली, कुंभार, तेली, वंजारी, धनगर, सुतार, गवली, यादव, गोंधली, शिंपी, भावसार, सोनार, न्हावी, धोबी, लोहार, साली, चित्रकथी, बंजारा, मुस्लीम मदारी, मुस्लीम शाहा, इराणी, ठाकुर, राजपूत, गुरव, गोसावी, वडार आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।
