परिवार नियोजन संसाधनों के बड़े प्रमाण में वितरण के बावजूद सफलता नहीं

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  • कोरोना के कारण नहीं हो सके शिविर

अकोला. प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष जिले परिवार नियोजन कार्यक्रम (फॅमिली प्लानिंग) पर अमल नहीं किया जा सका है. पहले इसके लिए अन्य कारण दिए जा रहे थे, लेकिन अब इसके लिए पूरी तरह से कोरोना को जिम्मेदार माना जा रहा है. इस साल की शुरुआत में जिले ने कई परिवार नियोजन सर्जरी की, जिससे महिलाएं आगे बढ़ीं और हमेशा की तरह, पुरुषों ने इससे मुंह मोड़ लिया. जब से कोरोना ने अप्रैल में जिले में प्रवेश किया, तब से जिले में कहीं भी परिवार नियोजन सर्जरी करना संभव नहीं था और इस साल के अंत तक, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों के लिए शून्य गैर-आक्रामक एनएसवी सर्जरी हुई हैं.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार पूरे देश में परिवार नियोजन सर्जरी की जाती है. इसके लिए सरकार से बड़ी राशि भी आती है. तहसील स्तर के साथ-साथ शहर में भी इन सर्जरी के लिए शिविर आयोजित किए जाते हैं. सर्जरी के दौर से गुजरने वाले पुरुषों और महिलाओं को भी बदले में कुछ पैसे दिए जाते हैं. एक या दो लड़कियों या लड़कों पर सर्जरी करके लाभार्थियों को भी लाभान्वित किया जाता है और जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करके उन्हें सम्मानित भी किया जाता है.

प्रत्येक वर्ष पूरे राज्य में प्रत्येक जिले को एक परिवार नियोजन लक्ष्य दिया जाता है. इस साल अकोला जिले के लिए बिंटाका एनएसवी 674 सर्जरी का लक्ष्य रखा गया था. इसमें 421 सर्जरी ग्रामीण क्षेत्रों और 253 शहरी क्षेत्रों के लिए योजना बनाई गई थी. कोरोना के कारण हालांकि, इस साल एक भी परिवार नियोजन शिविर नहीं लगाया गया, जिसके परिणाम स्वरूप कोई सर्जरी नहीं हुई. सूत्रों ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में महिलाओं (टाका अबडॉमीनल) पर 254 सर्जरी की गईं.

जिले में महिलाओं पर कुल 7,423 सर्जरी का लक्ष्य रखा गया था. जिनमें से 1,377 सर्जरी कोरोना के आने से पहले की गईं. इसका प्रतिशत केवल 17 है. जिले में दो बच्चों पर 795 महिलाओं की सर्जरी हुई है. यह प्रतिशत कुल लक्ष्य का केवल 15 प्रतिशत है. इससे जिले के समग्र प्रदर्शन का अंदाजा लगना चाहिए. पुरुषों की सर्जरी का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमेशा की तरह, उन्होंने इससे मुंह मोड़ लिया है.

कोरोना के दौरान संसाधनों का वितरण

कोरोना अवधि के दौरान, परिवार नियोजन संसाधनों के वितरण में कोई कमी नहीं आयी. जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 3,307 महिलाओं को तांबी लगायी गयी. महिलाओं को जन्म नियंत्रण की गोलियों के 13,188 पैकेट दिए गए. पुरुषों को कंडोम के 78,081 पैकेट दिए गए थे.

परिवार नियोजन में पिछड़ता जा रहा जिला

परिवार नियोजन सर्जरी के मामले में हर साल अकोला जिला पिछड़ता हुआ पाया गया है. अब तक, जिला कभी भी 65 प्रतिशत से ऊपर नहीं गया है. इस बीच, इन सर्जरी पर चिकनगुनिया का समान प्रभाव पड़ा, लेकिन अब कोरोना का प्रकोप बढ़ गया है. मुख्यालय पर एलर्जी के कारण चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्य कर्मचारी मौके पर नहीं मिलते हैं. अकोला जिला परिषद के लिए यह प्रकार नया नहीं है.

आज तक जिला परिषद के कार्यकाल के दौरान, जब अश्विनी जोशी जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे, उन्होंने एक आश्चर्यजनक दौरा किया था और चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आड़े हाथों लिया था. इतना ही नहीं उन्होंने कई को सस्पेंड भी किया था. तब से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इसका राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे परिवार नियोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.

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