Akola News: 30 जनवरी से शुरू होगा नरनाला महोत्सव, 393 एकड़ क्षेत्र में फैला ऐतिहासिक किला
Narnala Festival:नरनाला महोत्सव 30 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक अकोला जिले में आयोजित किया जाएगा, जिसमें नरनाला किले और मेलघाट के वनवैभव का पर्यटन के लिए विशेष प्रदर्शन होगा और स्थानीय आदिवासी समाज को रोज
- Written By: आंचल लोखंडे
Narnala Festival:नरनाला महोत्सव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Akola Tourism: सतपुड़ा पर्वत की गोद में स्थित मेलघाट के वनवैभव और आदिम संस्कृति को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से नरनाला महोत्सव 30 जनवरी से 1 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव से जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है, ऐसा वनप्रेमियों, कलाकारों और शोधकर्ताओं ने व्यक्त किया है।
अकोला जिले के अकोट तालुका के उत्तर में शहानुर गांव के पास सातपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित नरनाला किला महोत्सव का मुख्य केंद्र रहेगा। ऐतिहासिक किले की ओर पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए महोत्सव का आयोजन किया गया है। अकोला के कलाकार प्रदीप गुरुखुद्दे की पहल पर यह महोत्सव पहली बार 2008 में आयोजित हुआ था।
रोजगार के अवसर भी उत्पन्न
इस महोत्सव में पर्यटकों के लिए वनपर्यटन, प्रकृति अध्ययन, वनस्पति एवं पक्षी-प्राणी पहचान, साहसिक खेलकूद, नौकाविहार और प्राकृतिक आपदा के समय खोज एवं बचाव प्रशिक्षण जैसी विविध गतिविधियों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, यह आयोजन स्थानीय आदिवासी समाज के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेगा।
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नरनाला किले का विवरण
- किला लगभग 393 एकड़ में फैला हुआ है।
- परकोटा दीवार की परिधि 27 मील और ऊँचाई लगभग 3,150 फीट है।
- किले में 22 विशाल दरवाजे और 366 बुरुज हैं। महाकाली दरवाजा आज भी अपनी भव्यता से पर्यटकों को आकर्षित करता है।
- किले में नरनाला, जाफराबाद और तेलियागढ़ नामक तीन भागों में कुल 22 तालाब हैं, जिनमें से 6 तालाबों में गर्मियों में भी पानी रहता है।
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वन्यजीव और संरक्षण
- महाराष्ट्र शासन ने नरनाला परिसर को अभयारण्य घोषित किया है।
- यह क्षेत्र अकोट वन्यजीव विभाग के नियंत्रण में है और 13.36 वर्ग किलोमीटर तक फैला है।
- परिसर के उत्तर में मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प स्थित है, जहां बाघ, तेंदुआ, भालू, जंगली बिल्ली, लोमड़ी और खरगोश जैसे वन्यजीव दिखाई देते हैं।
नरनाला कैसे पहुंचे
- नरनाला किला, अकोट शहर से 24 किमी और अकोला शहर से लगभग 69 किमी दूर है।
- अकोला से अकोट मार्ग होते हुए शहानुर-नरनाला पहुंचा जा सकता है।
- शहानुर गांव के प्रवेश द्वार पर वाहन पार्किंग की सुविधा है, लेकिन निजी वाहन किले तक नहीं ले जाए जा सकते।
- किले तक पहुँचने के लिए जिप्सी और गाइड की सुविधा उपलब्ध है।
- ठहरने के लिए वन विभाग द्वारा इको-टूरिज्म कॉटेजेस बनाए गए हैं।
- नरनाला महोत्सव से न केवल ऐतिहासिक धरोहर का परिचय मिलेगा, बल्कि पर्यटन विकास को नई दिशा मिलेगी और आदिवासी समाज के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।
