किसानो को मिलेगी 2 लाख तक कर्ज माफ़ी? विधायक रणधीर सावरकर ने विधानसभा में रखी मांग
Maharashtra Farmer Debt Relief: महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक रणधीर सावरकर ने किसानों को 2 लाख तक अतिरिक्त कर्जमाफी की मांग की। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सावरकर ने प्रशासनिक तंत्र पर भी उठाए सवाल।
- Written By: केतकी मोडक
विधायक रणधीर सावरकर (सोर्स - सोशल मीडिया)
Maharashtra MLA Loan Waiver News: महाराष्ट्र विधानसभा में बुधवार को सत्तारूढ़ पक्ष के नियम 293 के तहत प्रस्तुत प्रस्ताव पर संबंधित मंत्री द्वारा दिए गए उत्तर से असंतोष व्यक्त करते हुए विधायक रणधीर सावरकर ने एक बार फिर सरकार और मंत्रालयीन प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण मुद्दों का संतोषजनक उत्तर सरकार की ओर से नहीं दिया गया है।
प्रमुखता से उठाया कर्जमाफी का मुद्दा
अकोला पूर्व विधानसभा क्षेत्र से विधायक रणधीर सावरकर ने विशेष रूप से किसानों की कर्जमाफी से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए कहा कि 50 हजार रुपये तक की कर्जमाफी का लाभ प्राप्त करने वाले लगभग 12 करोड़ 71 लाख किसान भागीदारों को राहत देने के लिए 50 हजार से 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने पर सरकार विचार करे। उन्होंने सहकार मंत्री से मांग की कि इस विषय को सरकार द्वारा गठित समीक्षा समिति के समक्ष रखा जाए, ताकि किसानों को और अधिक राहत मिल सके तथा उनका आर्थिक कष्ट कम हो।
किसानों से जुड़े इन मुद्दों पर भी मांगे जवाब
इसके अलावा, कृषि विभाग से संबंधित चर्चा के दौरान भी सावरकर ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए, जिनका उत्तर उन्हें नहीं मिला। उन्होंने राज्य में ‘मिलेट बोर्ड’ की स्थापना, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय को प्रस्तावित 4 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता तथा ‘महाराष्ट्र राज्य कृषि शिक्षा परिषद’ की उपयोगिता पर सवाल उठाए।
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महाराष्ट्र विधानसभा विधायक सावरकर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कृषि शिक्षा परिषद राज्य के चारों कृषि विश्वविद्यालयों पर एक अनावश्यक बोझ बन गई है और केवल उनका आर्थिक व प्रशासनिक शोषण कर रही है। इसलिए इस परिषद को भंग करने के संबंध में सरकार का स्पष्ट रुख सामने आना चाहिए।
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अधिकारियों पर महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप
- विधानसभा में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंत्रियों के उत्तर तैयार करने वाले प्रशासनिक अधिकारी जानबूझकर महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे सदन को पूर्ण और तथ्यात्मक जानकारी नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर विषय है और प्रशासनिक स्तर पर इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
- इस पर कृषि मंत्री ने अपने उत्तर में कहा कि सदन के जिन सदस्यों द्वारा उठाए गए प्रश्नों का जवाब चर्चा के दौरान नहीं दिया जा सका है, उन सभी प्रश्नों के लिखित उत्तर संबंधित सदस्यों को जल्द ही उपलब्ध करा दिए जाएंगे। विधायक सावरकर ने सरकार से किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े इन संवेदनशील मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लेने तथा सदन को स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।
