Akola: अकोला पुरोहित संघ का संदेश, स्त्री जाति का सम्मान यम द्वितीया पर जीवित रखें
Bhaidooj Celebration In Akola: यम द्वितीया पर बहन का सम्मान करना बेहद जरूरी है। इस दिन ब्रह्मा-विष्णु-शिव और माता सरस्वती का अवश्य पूजन करें। भाईदूज के दिन गाय या जूते का दान करें।
- Written By: अपूर्वा नायक
भाईदूज (सौ. नवभारत )
Akola News In Hindi: यम द्वितीया समस्त नारी समाज का सम्मान है, ब्रह्मा विष्णु और भगवान शिव तथा माता सरस्वती का पूजन करें, गाय का दान करना चाहिए, एक जोड़ा जूतों का दान करें, यमराज की भी पूजा करना चाहिए, यम द्वितीया संबंधों को जीवित रखती है। यह कथन अकोला पुरोहित संघ के पं। रवि कुमार शर्मा ने यम द्वितीया निमित्त किया है।
पंडित रवि कुमार शर्मा बताते हैं कि “यम द्वितीया के दिन प्रातः काल स्नान इत्यादि से निवृत होकर नूतन वस्त्र को धारण करके गूलर के वृक्ष के नीचे जाकर ब्रह्मा विष्णु और भगवान शिव का पूजन करें। माता सरस्वती का पूजन करें।
वेदवेत्ता सत्य निष्ठ ब्राह्मण को गाय का दान करना चाहिए क्षमता ना हो तो एक जोड़ा जूतो का दान करें। यमुना जल में स्नान करके यमराज की भी पूजा करना चाहिए।
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यह स्त्री जाति के सम्मान का दिन है
दोपहर 12 से 3:00 बजे का समय मोटे तौर पर यह भाई दूज के लिए बताया गया है। महाराष्ट्र में इसे भाई दूज कहते हैं। इस दिन अपनी बहन के वहां जाकर श्रद्धा के साथ भोजन करना चाहिए यदि बहन ना हो तो बुआ के वहां जाना चाहिए। संबंधों को जीवित रखती है यम द्वितीया। प्रत्येक स्त्री किसी न किसी की बहन जरूर होती है। वास्तव में यह स्त्री जाति के सम्मान का दिन है। बहन के चरणों में यमुना की पवित्रता और स्वर्ग का वास समझना चाहिए।
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बहन का सम्मान करने पर यम यातना नहीं भुगतनी पड़ेगी
स्वयं यमराज ने अपनी बहन यमुना को भोजन के उपरांत अनेक प्रकार के अलंकार वस्त्र भेंट किए थे। साथ में वरदान दिया था जो आज के दिन अपनी बहन का सम्मान करेगा उसे कभी यम यातना भुगतनी नहीं पड़ेगी। भारतीय सभ्यता और संस्कारों की हजारों वर्ष इस परंपरा के अंतर्गत मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने का सम्मान छिपा है स्त्री जातिकी प्रतिष्ठा आवश्यकता स्त्री के पूजन के रूप में भाई दूज के दिन विद्यमान दिखाई देती है।”
