अकोलो में मध्यरात्रि की बाढ़ से मची तबाही;पठार नदी का पानी घुसा गांवों में, खेतों में मलबे से बुआई संकट में!
Akola Flood: अकोट तहसील के वरूर और जऊलका गांवों में 30 जून की मध्यरात्रि पठार नदी में आई अचानक बाढ़ से भारी तबाही हुई है। पानी गांवों और खेतों में घुसने से बुआई के काम पिछड़ गए हैं।
- Written By: केतकी मोडक
अकोट तहसील में बाढ़ का पानी (सोर्स- फोटो नवभारत)
Akola Akot Flash Flood Pathar River: अकोला जिले के अकोट तहसील के वरूर और जऊलका गांवों के बीच बहने वाली पठार नदी में 30 जून की मध्यरात्रि को अचानक इस सीजन की पहली बड़ी बाढ़ आ गई। इस बाढ़ का पानी सीधे गांवों और खेतों में घुस गया। खेतों में पानी भर जाने के कारण अब किसानों को दोबारा बुआई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बताया गया है कि मंगलवार की शाम को गांव में केवल हल्की वर्षा हुई थी, लेकिन ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश होने के कारण नदी में अचानक यह उफान आया।
वरूर गांव में बाढ़ का पानी मुख्य सड़क, पशु चिकित्सालय, महादेव मंदिर परिसर और जिला परिषद स्कूल के प्रांगण तक पहुंच गया। आधी रात के समय अचानक बस्तियों में पानी घुसने से ग्रामीण बुरी तरह भयभीत हो गए। उधर, जऊलका गांव में भी छत्रपति शाहू विद्यालय, योगयोगेश्वर संस्थान और बस स्टैंड परिसर में भारी मात्रा में पानी और कीचड़ भर गया है।
नदी किनारे के खेतों में बुआई से पहले ही पानी घुस जाने से किसानों का पूरा गणित बिगड़ गया है और अब उन्हें देर से बुआई करनी पड़ेगी। पानी का बहाव इतना तेज था कि नदी के बड़े-बड़े पत्थर बहकर पुल पर आ गए, जिससे आवागमन करने वाले नागरिकों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा। वरूर गांव में पानी को रोकने के लिए सुरक्षा दीवार (प्रोटेक्टिव वॉल) बनाई गई है, लेकिन इसके बावजूद पानी गांव के भीतर घुस गया, जिससे नागरिकों की चिंता और बढ़ गई है।
सम्बंधित ख़बरें
नरीमन प्वाइंट से कफ परेड तक नई कोस्टल रोड पर काम शुरू; 20 मिनट का सफर 5 मिनट में होगा पूरा, ट्रैफिक से राहत
तारापुर MIDC की रासायनिक फैक्ट्री में बड़ा हादसा: रिएक्टर फटने से दो मजदूर गंभीर रूप से घायल, जांच शुरू
अब पेड़ टूटना कैसे रोकेंगे, चेंबूर स्कूल बस हादसे में छात्र की मौत पर मंत्री संजय शिरसाट के बेरहम बयान से बवाल
नागपुर एयरपोर्ट की 670 एकड़ जमीन का होगा आर्थिक कायाकल्प; भव्य कमर्शियल प्रोजेक्ट से राजस्व जुटाने की तैयारी
स्थायी उपाय जरूरी
ग्रामीणों ने बताया कि पठार नदी में हर वर्ष इसी तरह भारी बाढ़ आती है और पानी बस्तियों में घुस जाता है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा नदी का पात्र (बेड) चौड़ा करने जैसी कोई स्थायी उपाययोजना नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसलिए संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों का इस ओर तुरंत ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।
खामगांव सिंचाई उपविभाग का लाभार्थियों से आह्वान
अकोला जिले के खामगांव में सिंचाई उपविभाग, खामगांव के अंतर्गत आने वाली मध्यम परियोजना के लाभधारक क्षेत्र के सभी किसानों से एक महत्वपूर्ण आह्वान किया गया है। उपविभागीय अभियंता, सिंचाई उपविभाग, खामगांव ने कहा है कि लाभक्षेत्र के सभी किसान अपने-अपने खेतों की सिंचाई नालियों (पाट-चारियों) की मंजूर मापदंडों के अनुसार तत्काल खुदाई और मरम्मत कर लें।
नालियों की इस समय पर मरम्मत से मानसून के दौरान अतिरिक्त बारिश का पानी नदियों और नालों में सुचारू रूप से बह सकेगा। इससे खेतों में पानी जमा होने की समस्या को रोका जा सकेगा और फसलों को संभावित नुकसान से बचाया जा सकेगा।
यह भी पढ़ें:- चेंबूर स्कूल बस हादसे में BMC की बड़ी गाज; सब-इंजीनियर सस्पेंड, विभागीय जांच और कड़े एक्शन के आदेश
सिंचाई विभाग ने स्पष्ट किया है कि नालियों की मरम्मत न होने के कारण यदि खेतों में बारिश का पानी जमा होता है, और उससे किसी भी बटाईदार (किराएदार) के खेत या फसलों को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसके लिए विभाग जिम्मेदार नहीं होगा। यह भी साफ कर दिया गया है कि ऐसी स्थिति में विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
इसलिए, सभी लाभार्थी किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने खेतों में मौजूद नालियों व गड्ढों की तुरंत खुदाई और मरम्मत करके सिंचाई विभाग के साथ सहयोग करें। इसके साथ ही, खामगांव सिंचाई उपविभाग ने नदी तट के किनारे रहने वाले नागरिकों से भी मानसून के इस मौसम के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने और पूरी तरह सतर्क रहने का आह्वान किया है।
