कम बारिश से भंडारा जिले में खरीफ बुवाई पर भारी असर, सिंचाई योजनाएं भी प्रभावित

Monsoon Deficit: कम बारिश के कारण भंडारा जिले में खरीफ बुवाई पर गहरा असर पड़ा है। खेतों में नमी की कमी से किसान परेशान हैं और सिंचाई योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे कृषि संकट बढ़ता जा रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
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Impact Of Low Rainfall On Kharif Crop Sowing In Bhandara:भंडारा जिले में खरीफ सीजन 2026-27 पर इस वर्ष कमजोर मानसून का संकट गहराता जा रहा है। प्रशासन ने 1.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन जून माह के अंत तक सामान्य से केवल 28.1 प्रतिशत वर्षा होने के कारण अधिकांश जलाशय और सिंचाई परियोजनाएं पर्याप्त पानी के अभाव से जूझ रही हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है और खरीफ की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब तक पर्याप्त बारिश नहीं

जिला प्रशासन ने 10,220 सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से 1,22,346.9 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें गोसीखुर्द राष्ट्रीय परियोजना, भंडारा सिंचाई विभाग, जिला परिषद का लघु सिंचाई विभाग तथा मृदा एवं जल संरक्षण विभाग शामिल हैं। हालांकि, पर्याप्त बारिश नहीं होने से इन परियोजनाओं की उपयोगिता फिलहाल सीमित होती दिखाई दे रही है।

खेतों में नमी नहीं बन पाई

मौसम के आंकड़ों के अनुसार जून में भंडारा जिले में 164.1 मिमी वर्षा अपेक्षित थी, लेकिन अब तक केवल 46.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी नहीं बन पाई है और अधिकांश किसान बुवाई का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग ने जिले में लगभग 1.96 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा है, जिसमें 1.81 लाख हेक्टेयर में धान की खेती प्रस्तावित है। लेकिन रोहिणी और मृग नक्षत्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने तथा आर्द्रा नक्षत्र में भी अपेक्षित वर्षा न मिलने से बुवाई प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में दोबारा बुवाई की आशंका भी बढ़ गई है।

मौसम की अनिश्चितता सबसे बड़ी चुनौती

प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध सिंचाई क्षमता का अधिकतम उपयोग किया जाएगा, लेकिन मौसम की अनिश्चितता सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कागजी योजनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था को तत्काल लागू करना होगा।

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