अकोला में पानी को लेकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, जीवन प्राधिकरण के कार्यालय पर ठिया आंदोलन
Akola Water Crisis: अकोला में 84 ग्राम क्षेत्रीय जलापूर्ति योजना के तहत 25 दिन में केवल एक बार पानी मिलने से नाराज ग्रामीणों ने यूबीटी के नेतृत्व में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण कार्यालय पर आंदोलन किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
Water Crisis (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Akola UBT Protest: 84 ग्राम क्षेत्रीय पानी आपूर्ति योजना के अंतर्गत आने वाले गांवों में पानी की आपूर्ति 25 दिन में केवल एक बार हो रही है। इस कारण नागरिकों को पीने के पानी के लिए दूर-दूर भटकना पड़ रहा है। आखिरकार नागरिकों का धैर्य टूट गया और उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के नेतृत्व में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के अकोला कार्यालय पर धावा बोलकर ठिया आंदोलन किया।
ग्रामस्थों ने अपनी व्यथा व्यक्त करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया, उन्होंने पानी के पाइप, नल, मटके और यहां तक कि चूड़ियां भी अभियंताओं को भेंट कर विरोध दर्ज कराया। आंदोलन में दहिहंडा, गणोरी, हिंगणी, बडद खुर्द, रोहणा, ब्रम्हपुरी, पाटी, काटी, दोनवडा, ठोकबडीं, जऊलखेड सहित कई गांवों के नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
25 दिन में केवल एक बार पानी की आपूर्ति
जिसमें शिवसेना जिला प्रमुख गोपाल दातकर, पार्षद अभय खुमकर, ज्ञानेश्वर गावंडे, संजय भांबेरे, अविनाश राऊत, गोपाल वावरे, श्रीकांत तिवारी, विश्वास मापे, सरपंच भीमराव आठवले, बजरंग बोदडे, गजानन चहाटे सहित 84 ग्राम जलापूर्ति योजना के अंतर्गत आने वाले गांवों के सैकड़ों नागरिक शामिल थे। पानी की आपूर्ति 25 दिन में केवल एक बार होती है। क्षेत्र खारे पानी पट्टे में होने से स्थानीय पानी पीने योग्य नहीं है, मरम्मत पर खर्च होने के बावजूद पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है।
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नागरिकों को भटकना पड़ रहा
नागरिकों को रोजी रोटी छोड़कर पानी के लिए भटकना पड़ता है, खुले स्थानों पर गंदा पानी जमा है और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं। आंदोलन के दौरान नागरिकों ने कार्यकारी अभियंता और ठेकेदार कर्मचारियों से सीधे सवाल किए, नागरिकों के आक्रामक रुख को देखते हुए अभियंताओं ने वहीं पर गांववार पानी आपूर्ति का नया नियोजन घोषित किया और आश्वासन दिया कि अब हर छठे दिन पानी की आपूर्ति होगी। इस आश्वासन से नागरिकों ने सतोष व्यक्त किया।
