अकोला अनशन (सौजन्य-नवभारत)
Akola News: महाराष्ट्र एसटी कामगार संगठन, अकोला विभाग द्वारा चलाया गया अनशन बुधवार, 27 अगस्त की शाम को समाप्त हुआ। यह निर्णय तब लिया गया जब राज्य परिवहन मुंबई के महाव्यवस्थापक, मुख्य कामगार अधिकारी और अमरावती प्रादेशिक व्यवस्थापक ने मध्यस्थता करते हुए 20 सितंबर तक सभी लंबित मांगों पर कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। संगठन के पदाधिकारी 25 अगस्त से अनशन पर बैठे थे, क्योंकि पूर्व में प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए गए थे।
उस दिन कई दौर की मैराथन बैठकें हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। अगले दिन, 26 अगस्त को वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में चर्चा हुई, जिसमें पदोन्नति प्रक्रिया में मौजूद खामियों को दूर कर 20 सितंबर तक सभी श्रेणियों की पदोन्नति पूरी करने का वादा किया गया। इसके साथ ही अकोला विभाग में अनुकंपा तत्त्व पर लंबित नियुक्तियों को भी शीघ्रता से निपटाने का निर्णय लिया गया।
जिन पदों की बिंदूनामावली अद्यतन हो चुकी है, उन्हें तुरंत नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा, 6,500 वेतनवृद्धि से संबंधित वार्षिक वेतनवृद्धि के लंबित अंतर को भी देने पर चर्चा हुई। बैठक में डिपों में अधिकारियों के व्यवहार, समय पर कार्य सूची न लगना, फॉर्म-4 की खामियां, ईटीआयएम मशीन की समस्याएं आदि मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार किया गया और संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए गए। इन सभी बिंदुओं पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद संगठन ने अनशन को 20 सितंबर तक के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।
संगठन के विभागीय सचिव रुपम वाघमारे और अध्यक्ष गणेश डांगे ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया, तो 22 सितंबर से अनशन पुनः शुरू किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासन की ओर से उपाध्यक्ष तथा व्यवस्थापकीय संचालक माधव कुसेकर, महाव्यवस्थापक भरसट, मुख्य कामगार अधिकारी कोनवडेकर, प्रादेशिक व्यवस्थापक अमरावती रोहन पलंगे, अकोला विभाग नियंत्रक विलास राठोड़ और कामगार अधिकारी मडावी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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यह अनशन न केवल एसटी कामगारों की मांगों को उजागर करने का माध्यम बना, बल्कि प्रशासन और कर्मचारियों के बीच संवाद की एक सकारात्मक पहल भी सिद्ध हुआ। अब सभी की निगाहें 20 सितंबर पर टिकी हैं, जब इन वादों की पूर्ति की उम्मीद की जा रही है।