RTE 1 km distance rule (सोर्सः सोशल मीडिया)
Akola Education News: अकोला जिले में आरटीई (राइट टू एजुकेशन) कानून के तहत 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना अनिवार्य है। इसके साथ ही निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों को प्रवेश स्तर पर कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित करनी होती हैं। इस प्रावधान के कारण कई अभिभावकों का अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने का सपना पूरा होता रहा है।
हालांकि इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में एक नया नियम लागू किया गया है, जिसके अनुसार अभिभावक केवल 1 किलोमीटर की दूरी के भीतर स्थित स्कूलों में ही प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस शर्त के कारण कई अभिभावकों को अपनी पसंद का स्कूल नहीं मिल पा रहा है। वहीं जिन क्षेत्रों में 1 किलोमीटर के दायरे में कोई निजी स्कूल नहीं है, वहां बच्चों के प्रवेश को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
जिले में इस बार 183 स्कूलों ने आरटीई पोर्टल पर पंजीकरण किया है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 191 थी। तेल्हारा तहसील सहित कई क्षेत्रों में कुछ निजी स्कूलों ने आवश्यक ऑनलाइन पंजीकरण ही नहीं कराया है। अभिभावकों का आरोप है कि पंजीकरण से बचकर कुछ स्कूल 25 प्रतिशत आरक्षित सीटें भरने से बचना चाहते हैं, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है और बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर आघात है।
शिक्षण विभाग ने नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है। ऐसे स्कूलों पर मान्यता रद्द करने, दंडात्मक कार्रवाई करने या नोटिस जारी करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
नए आदेश के अनुसार आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के दस्तावेजों की जांच का अधिकार सीधे निजी बिना अनुदानित स्कूलों को दे दिया गया है। इससे पहले यह कार्य गट शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र समिति द्वारा किया जाता था।
ये भी पढ़े: अकोला मनपा में आज ‘फैसलों का सोमवार’! 8 स्वीकृत पार्षदों के नामों की होगी आधिकारिक घोषणा
इस बदलाव के बाद पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एमपीजे संगठन ने मुख्यमंत्री को निवेदन देकर 1 किलोमीटर दूरी की बाध्यता और दस्तावेज जांच का अधिकार निजी स्कूलों को देने के निर्णय को रद्द करने की मांग की है। अब इस पूरे मामले में प्रशासन क्या फैसला लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।