अकोला में 203 जर्जर इमारतों पर मनपा की नजर, बारिश से पहले जारी किया ‘ये’ नोटिस
Dangerous Buildings: अकोला महानगरपालिका ने मानसून के दौरान संभावित हादसों को रोकने के लिए शहर की 203 जर्जर और खतरनाक इमारतों के मालिकों को नोटिस जारी किए हैं। अधिकांश इमारतें 60 से 70 वर्ष पुरानी हैं।
Building Safety Campaig (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Akola Municipal Corporation: बरसात के मौसम में पुरानी और जर्जर इमारतों के गिरने से होने वाली संभावित जनहानि को रोकने के लिए मनपा ने पहले से ही कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। निगम क्षेत्र की कुल 203 जर्जर इमारतों के मालिकों को इमारत गिराने संबंधी नोटिस जारी की गई है।
सबसे अधिक जर्जर इमारतें पूर्व और पश्चिम ज़ोन में हैं। ये इमारतें 60 से 70 वर्ष पुरानी हैं और रखरखाव की कमी के कारण अत्यंत जीर्ण हो चुकी हैं। बरसात में दीवारों में पानी रिसने से इनके कभी भी गिरने की आशंका है। मनपा ने चेतावनी दी है कि यदि इमारतें समय पर नहीं गिराई गईं और कोई दुर्घटना हुई, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित मालिक की होगी।
अकोला की 203 खतरनाक इमारतों को गिराने के आदेश
ज़ोनवार स्थितिपूर्व ज़ोन उमरी, जठारपेठ और रामदासपेठ क्षेत्र में कुल 64 जर्जर इमारतों को नोटीस दी गई। पश्चिम ज़ोन किला से जयहिंद चौक और गोडबोले प्लॉट क्षेत्र में 118 जर्जर इमारतें थीं। इनमें से 6 की मरम्मत की गई, 20 को गिरा दिया गया और शेष 82 मालिकों को नोटीस दी गई। उत्तर ज़ोन मोहम्मद अली चौक, अकोट फैल और तारफैल क्षेत्र की 57 इमारतों को नोटीस दी गई। दक्षिण ज़ोन यहाँ केवल एसटी महामंडल और पुलिस प्रशासन की कॉलोनियां हैं, जो फिलहाल खाली हैं। निजी जर्जर इमारतें नहीं होने से यहां कोई खतरा नहीं है।
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इमारतें गिराने की चुनौती
इन अतिधोकादायक इमारतों को गिराने में मनपा और मकान मालिकों के सामने बड़ी चुनौती है। इन पुराने इलाकों की इमारतों में वर्षों से किरायेदार रह रहे हैं। वर्तमान में शहर में ज़मीन के दाम बहुत बढ़ गए हैं, जिससे मकान मालिक इन जर्जर इमारतों को गिराने के पक्ष में हैं, लेकिन किरायेदार घर खाली करने को तैयार नहीं हैं। इस कारण मकान मालिकों और मनपा को कार्रवाई में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
