

Pratap Sarnaik Bhayandar Marathi Tenant: देश की आर्थिक राजधानी और महाराष्ट्र के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में स्थानीय मराठी नागरिकों के साथ आवास को लेकर होने वाले भेदभाव के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताज़ा मामला भायंदर पश्चिम का है, जहां रेणुका शिंदे नाम की एक स्वाभिमानी महिला अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए चाय बेचने का छोटा सा व्यवसाय करती हैं। अपना खुद का मकान न होने के कारण रेणुका फिलहाल अपने पति और एक छोटे बच्चे के साथ अपनी छोटी सी दुकान में ही रहने को मजबूर हैं। जगह की अत्यधिक कमी और बच्चे के भविष्य को देखते हुए उन्होंने इस इलाके में एक किराए का कमरा ढूंढना शुरू किया था।
इसके लिए उन्होंने स्थानीय प्रॉपर्टी एजेंट से संपर्क किया, जिसने उन्हें पास की ही एक बहुमंजिला इमारत में एक फ्लैट दिखाया। रेणुका को वह घर पसंद आ गया और वे उसका एडवांस देने के लिए भी तैयार हो गईं। हालांकि, जब प्रॉपर्टी एजेंट ने मकान मालिक से बात की, तो मकान मालिक ने साफ कह दिया कि वे मराठी लोगों को अपने परिसर में रखना पसंद नहीं करते। रेणुका ने मकान मालिक को यह भी भरोसा दिलाया कि वे पूरी तरह शाकाहारी हैं और केवल शांति से रहने के लिए घर चाहती हैं, लेकिन अमराठी मकान मालिक अपने अड़ियल और भेदभावपूर्ण फैसले पर कायम रहा।
अपने ही राज्य में इस तरह के प्रांतीय और भाषाई भेदभाव का सामना करने के बाद रेणुका शिंदे भावुक हो गईं और उन्होंने रोते हुए अपने साथ हुए इस अन्याय का एक वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। यह वीडियो देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गया और मराठी अस्मिता का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। वीडियो का संज्ञान लेते हुए क्षेत्र के कद्दावर नेता और विधायक प्रताप सरनाईक शुक्रवार, 29 मई को तुरंत रेणुका शिंदे से मिलने पहुंचे। उन्होंने महिला को सांत्वना दी और आश्वस्त किया कि वे और उनकी पार्टी पूरी ताकत के साथ इस परिवार के पीछे खड़े हैं।
पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान प्रताप सरनाईक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने तुरंत उस विवादित मकान मालिक और संबंधित प्रॉपर्टी एजेंट को अपने सामने तलब किया और जनप्रतिक्षालयों के सामने ही उनकी इस संकीर्ण मानसिकता के लिए कड़ी फटकार लगाई। सरनाईक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "महाराष्ट्र में रहकर मराठियों के अस्तित्व और उनकी पहचान को मिटाने या उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक समझने की कोशिश जो भी करेगा, उसे कभी बख्शा नहीं जाएगा। अगर कोई प्यार की भाषा नहीं समझता, तो शिवसेना अपने पुराने और परिचित अंदाज में जवाब देना अच्छे से जानती है।"
इस बेहद संवेदनशील घटना के बाद मीरा-भायंदर और मुंबई के उपनगरों में एक बार फिर प्रांतीय राजनीति और 'मराठी बनाम अमराठी' की पुरानी बहस पूरी तरह से भड़क उठी है। प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि वे इस मामले में भायंदर पश्चिम पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र सौंप रहे हैं, जिसमें इस तरह समाज में नफरत और भेदभाव फैलाने वाले मकान मालिक के खिलाफ कड़ी धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई एक मिसाल बनेगी ताकि भविष्य में कोई भी मकान मालिक किसी किराएदार की जाति या भाषा देखकर उसे घर देने से मना न कर सके।