अकोला में उष्माघात से निपटने प्रशासन अलर्ट, 137 बेड आरक्षित; 12 से 4 बजे तक सावधानी की अपील
अकोला जिलाधिकारी वर्षा मीणा ने उष्माघात उपाय योजनाओं का जायजा लिया। अस्पतालों में 137 खाटें आरक्षित की गई हैं और नागरिकों को दोपहर 12 से 4 बजे तक धूप से बचने की सलाह दी गई है।
Akola Health Department News: अकोला जिले में बढ़ते तापमान और उष्णलहर की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी वर्षा मीणा ने निर्देश दिए कि उष्माघात से बचाव के लिए प्रभावी जनजागृति की जाए और सभी अस्पतालों व प्रशासनिक यंत्रणाओं को पूरी तरह सुसज्ज रखा जाए।
जिलाधिकारी कार्यालय में उष्माघात उपाय योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर निवासी उपजिलाधिकारी गजेंद्र मालठाणे, जिला शल्य चिकित्सक डॉ. आरती कुलवाल, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलीराम गाढवे, शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ. संजय सोनूने सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोस्टर, बैनर और हस्तपत्रिकाओं के माध्यम से नागरिकों में जनजागृति की जा रही है। जिलाधिकारी वर्षा मीणा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनीता मेश्राम, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलीराम गाढवे और जिला शल्य चिकित्सक डॉ. आरती कुलवाल ने नागरिकों से अपील की कि वे उष्माघात से बचाव के उपायों का पालन करें और जागरूकता फैलाएँ।
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प्रमुख निर्देश: प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था में उष्माघात कक्ष स्थापित किया गया है। सरकारी व ग्रामीण अस्पतालों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 137 खाटें आरक्षित रखी गई हैं। ओआरएस और औषधि का पर्याप्त भंडार उपलब्ध रखा जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी द्वारा जनजागृति, नगर क्षेत्रों में कचरा घंटागाड़ी से सूचना, तथा शहर में होर्डिंग्स, पोस्टर और ध्वनीचित्रफीती के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाए। स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद लेकर जनजागृति को और प्रभावी बनाया जाए।
कोट: उष्माघात के लक्षण उष्माघात के लक्षणों में अत्यधिक पसीना आना, अधिक प्यास लगना, त्वचा का सूखना, 102 से अधिक बुखार, चक्कर आना, सिरदर्द, अस्वस्थता, उल्टी या बेहोशी आदि शामिल हैं। इन लक्षणों पर तुरंत शरीर का तापमान कम करने और नजदीकी अस्पताल में उपचार लेने की सलाह दी गई। डॉ. बलीराम गाढवे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी।
- बचाव के उपाय सिर पर टोपी, रुमाल या छतरी का उपयोग करें। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। दोपहर 12 से 4 बजे तक घर में रहें। पर्याप्त मात्रा में पानी, ताक, नींबू पानी और नारियल पानी का सेवन करें।
- धूप में नंगे पाँव न चलें। बच्चों या पालतू जानवरों को बंद गाड़ी में न छोड़ें। मद्य, चाय, कॉफी और अधिक शक्करयुक्त पेय से बचें।
