टीपू सुल्तान विवाद (सौजन्य-नवभारत)
Akola BJP Protest: अकोला में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना किए जाने पर भाजपा ने अकोला में आक्रामक आंदोलन किया। रविवार को नए बस स्थानक चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने तीव्र प्रदर्शन कर हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ नारेबाजी की। भाजपा नेताओं का कहना था कि छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना किसी भी धर्मांध शासक से करना महाराष्ट्र की अस्मिता का अपमान है।
आंदोलन का नेतृत्व सांसद अनूप धोत्रे, विधायक रणधीर सावरकर, विधायक वसंत खंडेलवाल, महापौर शारदा खेडकर, पूर्व महापौर विजय अग्रवाल, जयंतराव मसने, गट नेता पवन महल्ले, गिरीश जोशी ने किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज जगत के आराध्य दैवत हैं और उनका अपमान करने वालों को महाराष्ट्र कभी माफ नहीं करेगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति के लिए इतिहास की तोड़मरोड़ बंद नहीं की, तो आगे आंदोलन और तीव्र होगा। इस आंदोलन का नियोजन भाजपा महानगर महासचिव एड. देवाशीष काकड ने किया। इस अवसर पर पूर्व पार्षद विनोद मनवानी, नितिन ताकवाले, बबलू जगताप, विनोद मापारी, कृष्णा पांडे, रणजीत खेडकर के साथ साथ अनेक भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता और युवक कांग्रेस के प्रदेश महासचिव कपिल ढोके ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा अवसर के अनुसार महापुरुषों के नाम का इस्तेमाल करती है और धार्मिक विवाद भड़काकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करती है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि 2012 में कर्नाटक के तत्कालीन भाजपा मुख्यमंत्री ने टीपू सुल्तान पर पुस्तक प्रकाशित कर उन्हें ‘मैसूर का शेर’, देशप्रेमी और दूरदर्शी नेता बताया था। उस समय भाजपा नेताओं ने विरोध क्यों नहीं किया? कपिल ढोके ने आगे कहा कि अकोला मनपा की स्थायी समिति सभागृह को टीपू सुल्तान का नाम देने का प्रस्ताव भाजपा नेता विजय अग्रवाल ने रखा था, तब भाजपा ने विरोध नहीं किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब भाजपा को छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान की इतनी चिंता है, तो श्रीपाद छिंदम और तत्कालीन राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी के विवादित वक्तव्यों पर भाजपा ने विरोध क्यों नहीं किया? कपिल ढोके ने आरोप लगाया कि भाजपा की यह भूमिका ढोंगी है और केवल राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास का उपयोग किया जा रहा है।