अहिल्यानगर में ठाकरे गुट को झटका, पूर्व विधायक अनिल राठौड़ के बेटे विक्रम शिंदे-सेना में शामिल
Maharashtra Politics: अहिल्यानगर में नगर निगम चुनावों से पहले शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा है, जब पूर्व विधायक अनिल राठौड़ के बेटे विक्रम राठौड़ ने शिवसेना में प्रवेश किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
Maharashtra Politics :अहिल्यानगर में नगर निगम चुनावों (सोर्सः सोशल मीडिया)
Ahilyanagar Politics: अहिल्यानगर नगर निगम चुनावों के माहौल के बीच शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पूर्व विधायक और दिवंगत नेता अनिल राठौड़ के पुत्र विक्रम राठौड़ ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में प्रवेश कर लिया है। वे पिछले कुछ दिनों से पार्टी से असंतुष्ट चल रहे थे।
शिवसेना के पूर्व नगरसेवक विक्रम अनिलभैया राठौड़ ने पुणे में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शिंदे शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने राज्य के उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में उन्हें शिवसेना का झंडा देकर स्वागत किया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक रवींद्र धंगेकर भी उपस्थित थे।
अनिल राठौड़ ने लगातार पांच बार अहिल्यानगर शहर का प्रतिनिधित्व किया
दिवंगत विधायक अनिल राठौड़ ने लगातार पांच बार अहिल्यानगर शहर का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने करीब 25 वर्षों तक शहर में हिंदुत्व के रक्षक के रूप में कार्य किया। चुनावी हार के बाद भी वे शिवसेना में उपनेता के रूप में सक्रिय रहे। कोरोना काल में उनके आकस्मिक निधन के बाद शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट में एक बड़ा संगठनात्मक शून्य पैदा हो गया था, जिसे भरने की जिम्मेदारी विक्रम राठौड़ पर थी।
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हालांकि, विक्रम राठौड़ ठाकरे गुट के हिंदुत्व को लेकर नरम रुख और सत्ता के लिए महाविकास अघाड़ी में शामिल होने से नाखुश थे। उनका मानना था कि गठबंधन की राजनीति के चलते पार्टी ने हिंदुत्व के मुद्दे से समझौता किया है।
शीर्ष नेतृत्व ने उनके योगदान को नजरअंदाज कि
हिंदुत्व के मुद्दे से दूर जाने से आहत विक्रम राठौड़ ने संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया। उन्होंने महाविकास अघाड़ी में पार्टी को मजबूत नेतृत्व दिलाने और स्थानीय स्तर पर शिवसेना की ताकत बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम किया। उन्हें उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपेगी, लेकिन उन्हें लगा कि शीर्ष नेतृत्व ने उनके योगदान को नजरअंदाज किया।
इसके अलावा, नगर निगम चुनावों में टिकट वितरण के दौरान उनके समर्थकों और स्थानीय नेताओं के साथ कथित तौर पर अन्याय किए जाने से भी वे नाराज थे। समय-समय पर दिए गए निर्देशों की अनदेखी के चलते उन्होंने अंततः अपने पद से इस्तीफा देने और शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने का निर्णय लिया।
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शिंदे गुट को समर्थन; राठौड़ पर भरोसा करने वाला वर्ग सक्रिय
गौरतलब है कि विक्रम राठौड़ हाल ही में अहिल्यानगर में आयोजित शिंदे शिवसेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मौजूद थे। उसी दौरान स्थानीय शिवसेना नेताओं ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की आगामी सार्वजनिक सभा में शामिल होने की घोषणा की थी। इससे पहले ही पूर्व विधायक रवींद्र धंगेकर ने उन्हें पुणे बुलाया, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी में प्रवेश किया।
सोमवार को अहिल्यानगर में शिंदे शिवसेना की विजय सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें विक्रम राठौड़ का विशेष सम्मान किया जाएगा। पार्टी में प्रवेश के दौरान भिंगर शहर प्रमुख प्रतीक भंडारी, उपशहर प्रमुख अमित लड्डा, उपशहर प्रमुख शुभम मिरांडे, शिवसेना संगठनकर्ता जिग्नेश जगगड़, उपजिला प्रमुख नरेश भालेराव सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
