farmers hunger strike Sonai (सोर्सः सोशल मीडिया)
Rahuri Shani Shingnapur Railway Line: सोनई क्षेत्र के किसानों ने शुक्रवार (13 मार्च) को सोनई बस स्टैंड परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने अनशन शुरू कर प्रस्तावित रेलवे लाइन का विरोध किया। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित रेलवे मार्ग सिंचित कृषि भूमि से होकर गुजर रहा है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। इस संबंध में किसानों ने सामूहिक रूप से उपजिलाधिकारी (डिप्टी कलेक्टर) के पास अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं।
केंद्र सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राहुरी से शनिशिंगणापुर तक 21.84 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन को मंजूरी दी है। इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। रेल मंत्रालय के सेंट्रल रेलवे विभाग ने 5 मार्च को जारी गजट अधिसूचना में बताया है कि इस परियोजना के लिए सोनई और शनिशिंगणापुर क्षेत्र के किसानों की लगभग 43.469 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
इस अधिसूचना के बाद से सोनई और आसपास के सिंचित क्षेत्रों के किसानों में चिंता और नाराज़गी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यह इलाका पूरी तरह सिंचित है और यहां बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है। यदि रेलवे लाइन इसी मार्ग से बनाई गई, तो कई छोटे किसानों की जमीन चली जाएगी और उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
किसानों का यह भी कहना है कि जमीन अधिग्रहण के समय सरकार द्वारा तय दरों पर मुआवजा दिया जाता है, जबकि वर्तमान में जमीन की बाजार कीमतें काफी अधिक हैं। ऐसे में उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल पाएगा। इसलिए किसानों की मांग है कि प्रस्तावित रेलवे लाइन का मार्ग बदलकर इसे कृषि भूमि के बजाय कम प्रभावित क्षेत्र से निकाला जाए।
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प्रभावित किसान अनिल निमसे ने प्रशासन को भूख हड़ताल का नोटिस दिया था। इस आंदोलन में भारत दरंडले, पोपटराव शेटे, संतोष कुंभकर्ण, डॉ. शुभम गडख, विजय निमसे, सचिन निमसे, ऋषिकेश कल्हापुरी और संतोष कल्हापुरी सहित कई किसानों ने भाग लेकर समर्थन दिया।
13 मार्च को सोनई में शुरू हुए इस अनशन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए, लेकिन किसानों का आरोप है कि किसी भी राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि ने इस आंदोलन की सुध नहीं ली। किसानों के अनुसार, इससे क्षेत्र के किसानों के मुद्दों के प्रति राजनीतिक उदासीनता साफ दिखाई देती है।