Jamkhed Bandh Warning (सोर्सः सोशल मीडिया)
Jamkhed Municipal Council: जामखेड शहर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर नेशनल हाईवे विभाग और जामखेड नगर परिषद के बीच चल रही चिट्ठी-पत्री और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों से मामला और उलझ गया है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो जामखेड शहर को अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जाएगा। इस बीच प्रशासन के सामने नई मुश्किलें भी खड़ी हो गई हैं। नगर परिषद द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद कुछ अतिक्रमणकारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
नेशनल हाईवे के सब-डिविजनल कार्यालय (पाथर्डी) की ओर से मार्च में जामखेड पुलिस निरीक्षक को एक पत्र भेजा गया था। इसमें कहा गया था कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस सुरक्षा का खर्च कौन वहन करेगा, इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि जामखेड नगर परिषद की सीमा के भीतर अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी मुख्य अधिकारी की है। साथ ही, कार्रवाई के लिए आवश्यक मशीनरी नेशनल हाईवे के ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
इस बीच, जामखेड से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर अवधूत पवार के नेतृत्व में 24 फरवरी से आंदोलन जारी है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के लिए 5 मार्च तक की समयसीमा दी थी। निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई नहीं होने से आंदोलनकारी नाराज हो गए हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सीमांकन कर वास्तविक रूप से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक जामखेड शहर को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखा जाएगा।
प्रांतीय अधिकारी नितिन पाटिल ने बताया कि जामखेड में अतिक्रमण के मुद्दे पर जिला कलेक्टर की मौजूदगी में सात-आठ संयुक्त बैठकें आयोजित की गई थीं। उन्होंने कहा कि इन बैठकों में हाईवे विभाग ने कभी यह नहीं कहा कि उसकी सीमा में कोई अतिक्रमण नहीं है। यदि अतिक्रमण नहीं था, तो पिछले चार वर्षों से सड़क निर्माण का कार्य पूरा क्यों नहीं हो पाया? उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन से मार्गदर्शन लेने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
नेशनल हाईवे के उप-विभागीय अभियंता ने जामखेड नगर परिषद को भेजे गए एक पत्र में कहा है कि हाईवे के ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) क्षेत्र में कोई अतिक्रमण नहीं पाया गया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि हाईवे की सीमा के बाहर अतिक्रमण हटाने का अधिकार इस कार्यालय के पास नहीं है। सार्वजनिक सड़कों की नियमित सीमा तय करना, निर्माण की अनुमति देना और सड़क पर अतिक्रमण हटाना नगर परिषद की जिम्मेदारी है।
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जामखेड नगर परिषद ने भी हाईवे विभाग को पत्र लिखकर जवाब दिया है। परिषद का कहना है कि किसी सड़क को नेशनल हाईवे घोषित किए जाने के बाद उसकी जमीन की सुरक्षा करना, उस पर हुए अतिक्रमण हटाना और मापन रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमण निर्धारित करना हाईवे विभाग की जिम्मेदारी है।
नगर परिषद ने यह भी कहा कि जिला कलेक्टर ने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया है। परिषद ने चेतावनी दी है कि गुमराह करने वाले पत्र भेजना बंद किया जाए, अन्यथा यदि किसी प्रकार की कानूनी समस्या उत्पन्न होती है तो संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे।