नागपुर मनपा, ग्रीन नेट योजना,(प्रतिकात्मक तस्वीर, सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

गर्मी में राहत या दिखावा? 65 लाख के ग्रीन नेट योजना पर उठे सवाल, गर्मी में देरी से जागी मनपा

Nagpur Green Net Proposal: नागपुर मनपा में 65 लाख के ग्रीन नेट प्रस्ताव पर सवाल। चिलचिलाती गर्मी के बीच देरी से मंजूरी और सीमित चौराहों पर योजना को लेकर आलोचना तेज।

अंकिता पटेल

Nagpur Municipal Corporation: नागपुर महानगर पालिका की अजीबोगरीब स्थिति है। मनपा में 4 वर्ष बाद हुए आम चुनावों में भारी जीत के बाद सत्ता पक्ष भाजपा ने पहले वर्ष महिला राज की घोषणा की। इसके पीछे मनपा की कमजोर आर्थिक स्थिति और महिलाओं में सीमित संसाधनों में सटीक संचालन का दावा किया गया था किंतु अब यह विफल होता दिखाई दे रहा है।

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक तो आधी गर्मी निकल जाने के बाद अब चिलचिलाती धूप से दोपहिया वाहन चालकों को बचाने के लिए चौराहों पर ग्रीन नेट के प्रस्ताव को स्थायी समिति की ओर से मंजूरी प्रदान की गई।

दूसरी ओर प्रस्ताव के अनुसार 65 लाख रुपये खर्च कर केवल 20 चौराहों पर ग्रीन नेट लगाने को हरी झंडी प्रदान की गई। स्थायी समिति की सभापति शिवानी दानी ने बताया कि यदि कहीं पर डिमांड होती है, तो इसी राशि में अन्य चौराहों पर भी ग्रीन नेट लगाने को ठेकेदार को कहा जाएगा।

30 अप्रैल तक लगने की संभावना

दानी ने कहा कि मनपा के ट्रैफिक विभाग की ओर से यह प्रस्ताव 12 दिनों की देरी से लाया गया। चूंकि टेंडर की प्रक्रिया पूरी करने से और देरी हो सकती थी, ऐसे में गत समय ग्रीन नेट ब्लगाने वाले सबसे कम राशि की बोली धारक कम्पनी को ही यह टेंडर देने का निर्णय लिया गया, यह प्रस्ताव देरी से क्यों लाया गया, इसकी जांच करने के निर्देश अतिरिक्त आयुक्त को दिए गए हैं। बहरहाल 30 अप्रैल तक सिटी के 20 चौराहों पर ग्रीन नेट लगने की आशा उन्होंने जताई, गर्मियों के दौरान लगातार बढ़ते तापमान और संभावित हीटवेव के मद्देनजर वाहन चालकों को राहत देने के लिए कदम उठाया जा रहा है। शहर के अति व्यस्त और भीड़भाड़ वाले चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने वाले वाहन चालकों को चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए अब चौराहों पर 'ग्रीन नेट' लगाए जाएंगे।

गत वर्ष के बजट से खर्च

प्रशासन की बेतरतीब कार्यप्रणाली का आलम यह है कि पीडब्ल्यूडी की अधीक्षक अभियंता की ओर से 27 मार्च 2026 को ही इस प्रस्ताव को तकनीकी मान्यता प्रदान की गई थी। निश्चित ही इसके पूर्व ही प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके विपरीत प्रस्ताव के अनुसार गत वर्ष के वित्तीय बजट में रखे गए वित्तीय प्रावधान में से राशि खर्च की जानी है।

ऐसे में कार्यदिश जारी कर मार्च में ही ग्रीन नेट लगाई जा सकती थी। इसके बाद कार्योत्तर मंजूरी लेने के लिए भी प्रस्ताव स्थायी समिति के समक्ष रखा जा सकता था। इस पूरे मामले पर पूछे जाने पर स्थायी समिति की सभापति ने कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती नहीं होगी।

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