Ujjain News: कौड़ी के भाव खरीड़ी गई महाकाल मंदिर के पास जमीन? रजिस्ट्री में BJP विधायक चिंतामणि मालवीय का नाम!
MP News: उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास स्थित 45 हजार वर्गफीट की सरकारी जमीन को निजी बेचने का मामला सामने आया है। इस रजिस्ट्री में BJP विधायक चिंतामणि मालवीय का नाम शामिल है।
- Written By: सजल रघुवंशी
Chintamani Malviya ( Source- Social Media)
Ujjain Mahakal Land Controversy: विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर के समीप स्थित करीब 45 हजार वर्गफीट की कीमती जमीन से जुड़े एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज शासकीय भूमि को सुनियोजित तरीके से निजी खातों में दर्ज कराया गया और बाद में उसे बेहद कम कीमत पर बेच दिया गया।
बताया जा रहा है कि इस प्राइम लोकेशन पर अब एक भव्य फाइव स्टार होटल निर्माण की तैयारी की जा रही है। मामला उजागर होने के बाद कांग्रेस पार्षद ने मुख्य सचिव, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) को लिखित शिकायत सौंपी है। वहीं, इस पूरे प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है।
रजिस्ट्री में बीजेपी विधायक और दिग्गजों के नाम
विवादों में आई इस जमीन को 2 मार्च 2026 को ‘यूटोपिया बोटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी ने करीब 3.82 करोड़ रुपए में खरीदा था। हैरानी की बात यह है कि कंपनी के डायरेक्टर्स और पार्टनर्स में आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और इकबाल सिंह गांधी जैसे प्रभावशाली नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
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सरकारी रिकॉर्ड से गायब की गई जमीन
सौंपे गए दस्तावेजों के मुताबिक, खसरा नंबर 3664/1 और 3666/1 को वर्ष 1950 तथा 1967-68 के सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से शासकीय भूमि के रूप में दर्ज किया गया था। आरोप है कि बाद में अधिकारियों की मिलीभगत से इस जमीन का रिकॉर्ड बदलकर उसे निजी भूमि में परिवर्तित कर दिया गया। फिलहाल इस जमीन के बड़े हिस्से का इस्तेमाल महाकाल मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों की पार्किंग के रूप में किया जा रहा है।
कमर्शियल लैंड को बताया कृषि लैंड
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिस जमीन पर पहले से मैरिज गार्डन और अन्य स्थायी निर्माण मौजूद थे, उन्हें दस्तावेजों में छिपाते हुए केवल टिन शेड दर्शाया गया। इसके अलावा व्यावसायिक उपयोग में आ रही इस जमीन की रजिस्ट्री कृषि भूमि बताकर कराई गई। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार इस क्षेत्र में जमीन की कीमत करीब 75,400 रुपए प्रति वर्गमीटर है, लेकिन रजिस्ट्री के दौरान इसकी कीमत मात्र 22,500 रुपए प्रति वर्गमीटर दर्शाकर दस्तावेज पास करा लिए गए।
राजस्व को लगा मोटा चूना
दस्तावेजी गणित के हिसाब से इस 4180 वर्गमीटर जमीन की वास्तविक बाजार कीमत करीब 31.51 करोड़ रुपए बैठती है। इस लिहाज से सरकार को 2.99 करोड़ रुपए का स्टांप शुल्क और 94.55 लाख रुपए की पंजीयन फीस मिलनी चाहिए थी। लेकिन कम कीमत आंककर सरकार को सिर्फ 40.36 लाख रुपए स्टांप ड्यूटी और 12.90 लाख रुपए रजिस्ट्रेशन फीस दी गई, जिससे सीधे तौर पर करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है।
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भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने दी सफाई
आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने जमीन विवाद को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि संबंधित जमीन महाकाल मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर है। उन्होंने दावा किया कि जमीन खरीदने से पहले 50 से 75 साल का रिकॉर्ड और सर्च रिपोर्ट जांची जाती है। विधायक ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन जिस श्रेणी में दर्ज होती है, उसी अनुसार टैक्स दिया जाता है। उन्होंने पार्किंग के दावों को खारिज करते हुए कहा कि किसी जमीन पर वाहन खड़े होने से वह सरकारी नहीं हो जाती, अंतिम फैसला अब कोर्ट करेगा।
