उमंग सिंघार का महाकाल जमीन विवाद पर हमला, कहा- 'उज्जैन में आस्था नहीं, BJP का लैंड मॉडल चल रहा'

Umang Singhar Targets Government On Land Controversy: उज्जैन महाकाल पार्किंग की सरकारी जमीन को बेचने के मामले में उमंग सिंघार ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने जमीन को भाजपा विधायक को बेचने का आरोप लगाया है।
Ujjain Mahakal Land Controversy
उमंग सिंघार और उनका X पोस्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Ujjain Mahakal Land Controversy: मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उज्जैन में महाकाल मंदिर की पार्किंग की सरकारी जमीन और भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। सिंघार ने X पर पोस्ट कर सरकार से सवाल पूछे हैं।

सिंघार ने X पर लिखा 'महाकाल की नगरी उज्जैन में अब आस्था नहीं, भाजपा का लैंड मॉडल चल रहा है। महाकाल मंदिर की पार्किंग के लिए उपयोग हो रही सरकारी जमीन पहले निजी बताई गई, फिर भाजपा विधायक से जुड़ी कंपनी को बेच दी गई और अब वहां फाइव स्टार होटल बनाने की तैयारी है।'

सरकार से पूछे सवाल

उन्होंने आगे लिखा 'दावा है कि करोड़ों की जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री की गई, जिससे लगभग ₹3.40 करोड़ की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की चोरी हुई। सब कुछ मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में हो रहा है। ऐसे में सवाल मुख्यमंत्री जी से है कि क्या आपकी सरकार में महाकाल लोक भी भाजपा नेताओं और आपके मित्रों की प्रॉपर्टी डील का हिस्सा बन चुका है?'

धर्म का आस्था नहीं, कारोबार बना दिया

सिंघार ने पोस्ट में लिखा 'पहले महाकाल लोक में भ्रष्टाचार के आरोप लगे और अब महाकाल की जमीन पर कब्जे और सौदेबाजी के आरोप लगे हैं। भाजपा सरकार ने धर्म को आस्था नहीं, कारोबार बना दिया है।'

क्या है मामला?

उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास पार्किंग के लिए उपयोग हो रही सरकारी जमीन को लेकर आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करीब 45 हजार वर्गफीट जमीन को बाद में निजी बताकर 2 मार्च 2026 को यूटोपिया बोटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड को 3.82 करोड़ रुपए में बेच दिया गया। कंपनी के डायरेक्टर और साझेदारों में आलोट के भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और इकबाल सिंह गांधी शामिल बताए जा रहे हैं। इस जमीन पर फाइव स्टार होटल बनाने की तैयारी की बात भी सामने आ रही है।

हाई कोर्ट से भी जांच की मांग

उज्जैन निवासी कांग्रेस पार्षद राजेंद्र कुवाल ने मुख्य सचिव, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू से लिखित शिकायत की है। साथ ही इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर जांच की मांग भी की गई है। शिकायत के अनुसार जिन खसरा नंबरों की यह जमीन है, वे पहले सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थे, लेकिन बाद में उन्हें निजी खातों में दर्ज कर दिया गया। इसके अलावा आरोप है कि रजिस्ट्री में जमीन को कृषि भूमि दिखाकर कम कीमत पर सौदा किया गया, जबकि इसका वास्तविक उपयोग कमर्शियल और पार्किंग के रूप में हो रहा है। इससे सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपए के नुकसान का दावा किया गया है।

भाजपा विधायक ने आरोपों को नकारा

इधर भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने अपने ऊपर लग रहे सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि पूरा सौदा नियमों और दस्तावेजों के आधार पर हुआ है तथा सभी शुल्क विधिवत जमा किए गए हैं। सभी आरोप झूठे और द्वेषपूर्ण हैं।

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