MP Transfer Policy : मोहन कैबिनेट की बैठक में नई तबादला नीति को मिलेगी मंजूरी, प्रशासनिक तबादलों की लिमिट तय
Madhya Pradesh Transfer Policy Draft: एमपी सरकार की वर्ष 2026 की नई तबादला नीति को बुधवार को डॉ. मोहन यादव कैबिनेट मंजूरी देगी। ड्राफ्ट सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयार कर CM सचिवालय को भेजा
- Written By: सुधीर दंडोतिया
मध्य प्रदेश मंत्रालय , सोर्स: सोशल मीडिया
MP Transfer Policy 2026 Bhopal: मध्य प्रदेश के कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। कल होने वाली कैबिनेट की बैठक में नयी तबादला निति को मंजूरी मिल सकती है ताबदले ड्राफ्ट के प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच चर्चा के बाद इसे कैबिनेट में लाने के लिए प्रस्तावित किया जाएगा। मंत्रियों की सहमति मिलने के बाद इसे स्वीकृति दी जाएगी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग आदेश जारी करेगा। इस तबादला नीति में स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों की लिमिट अलग-अलग रखी जा सकती है।
स्वैच्छिक तबादलों की लिमिट नहीं रखने का आग्रह
इससे पहले 11 मई को हुई कैबिनेट बैठक के दौरान मंत्री विजय शाह ने स्वैच्छिक तबादलों की लिमिट न रखने का आग्रह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से किया था। इस पर सीएम ने विचार करने की बात कही थी। साथ ही अगली कैबिनेट बैठक में तबादला नीति का प्रस्ताव रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे। पूर्व में कैबिनेट बैठक 18 मई यानी सोमवार को प्रस्तावित थी, लेकिन मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिव्यू मीटिंग और निगम-मंडल अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की ट्रेनिंग के चलते बैठक टाल दी गई।
सीएम की व्यस्तता के चलते आज नहीं हुई बैठक
मंगलवार को सीएम दिनभर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा ली जाने वाली क्षेत्रीय परिषद की बैठक में व्यस्त रहे। इस कारण मंगलवार को भी कैबिनेट बैठक नहीं हो सकी। अब बुधवार को सुबह 11 बजे से मंत्रालय में कैबिनेट बैठक होगी, जिसमें अन्य एजेंडों के साथ तबादला नीति का प्रस्ताव भी लाया जाएगा।
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प्रशासनिक और स्वैच्छिक तबादले अलग
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अब तक जारी होने वाली तबादला नीति में स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों की लिमिट तय रहती थी। कुल कार्यरत कर्मचारियों के 10 से 15 फीसदी तबादलों को ही अनुमति दी जाती थी। इस व्यवस्था में स्वैच्छिक और आपसी (म्युचुअल) तबादले भी इसी कोटे का हिस्सा होते थे।
तबादला नीति में स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों के लिए अलग-अलग व्यवस्था
इससे प्रशासनिक आधार पर जरूरी फेरबदल की गुंजाइश कम बचती थी। ऐसे में जहां वास्तव में कर्मचारियों की जरूरत होती थी, वहां ट्रांसफर नहीं हो पाते थे। अब प्रशासनिक तबादले अधिक हो सकेंगे। बुधवार को आने वाली तबादला नीति में स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होने की उम्मीद है।
हर बार की तरह स्कूल शिक्षा की पॉलिसी अलग
तबादलों के लिए सभी विभाग ऑनलाइन आवेदन जमा कराएंगे। यह प्रस्ताव भी है कि स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति हर साल की तरह इस साल भी अलग रहेगी। इसके अलावा जनजातीय कार्य, राजस्व विभाग और ऊर्जा विभाग जैसे कुछ अन्य विभाग भी अपनी अलग ट्रांसफर पॉलिसी जारी कर सकते हैं, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी तबादला नीति के मूल तत्वों से अलग कोई विभाग नीति नहीं बना सकेगा।
जिलों में प्रभारी मंत्री और कलेक्टर को पावर
तबादला नीति के प्रस्तावों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को जिले के भीतर प्रभारी मंत्रियों और कलेक्टरों के जरिए स्थानांतरित किया जाएगा। प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद कलेक्टर तबादला सूची जारी करेंगे।वहीं प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के तबादले के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी। प्रस्तावित नीति में पिछले एक वर्ष के भीतर स्थानांतरित किए गए कर्मचारियों का सामान्य परिस्थितियों में दोबारा तबादला नहीं किया जाएगा।
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राज्यमंत्री 25 हजार रुपए दे सकेंगे स्वेच्छानुदान
उधर, सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि बढ़ाने को लेकर मोहन कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले के बाद आदेश जारी कर दिए हैं।विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि स्वेच्छानुदान के रूप में अब तक राज्यमंत्री 16 हजार रुपए देते रहे हैं। कैबिनेट द्वारा 11 मई को लिए गए फैसले के बाद यह राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दी गई है।
