सीहोर में बैंक मैनेजर और कर्मचारियों की मनमानी, 6 भाइयों की मर्जी के बिना खाते से छेड़छाड़; नया अकाउंट भी खोला
Sehore Bank Manager Fraud: सीहोर के इछावर में ग्रामीण बैंक की बड़ी लापरवाही, 6 भाइयों की सहमति के बिना केसीसी खाते से छेड़छाड़, कड़े विलेख संग सुशासन ग्रिड एक्टिव।
- Reported By: विजेंद्र सिंह राणा | Edited By: सजल रघुवंशी
सीहोर बैंक मैनेजर फ्रॉड (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sehore Bank Fraud: सीहोर के इछावर में नजदीकी ग्राम ढाबला माता में मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही और मनमानी का मामला सामने आया है। यहाँ बैंक मैनेजर और कर्मचारियों पर धोखाधड़ी और नियमों को ताक पर रखकर एक किसान परिवार के खाते से छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
पीड़ितों का कहना है कि उनकी लिखित चेतावनी के बावजूद बैंक ने महज दो भाइयों की सहमति से नया खाता खोल दिया, जबकि बाकी चार भाइयों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम ढाबला माता के निवासी अनवर खां ने बताया कि उनके पिता अशरफ खा के नाम पर बैंक में एक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन खाता था। जब सभी भाई इस लोन की राशि जमा कर खाते को स्थायी रूप से बंद करवाने बैंक पहुँचे, तो उनके होश उड़ गए। उन्हें पता चला कि बैंक रिकॉर्ड और उनके खाते के साथ बड़ी हेरफेर की गई है पीड़ित परिवार जब मामले की शिकायत और जानकारी के लिए सीहोर मुख्य शाखा पहुँचा, तो एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ बैंक प्रबंधन ने उनकी बिना किसी सामूहिक सहमति के एक और नया खाता खोल दिया था।ल
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लिखित आवेदन को भी किया दरकिनार
अनवर खां के मुताबिक, करीब 6 महीने पहले ही उन्होंने बैंक को एक लिखित आवेदन देकर स्पष्ट रूप से सचेत किया था कि हमारे पिताजी के खाते में किसी भी प्रकार का लेन-देन या बदलाव सभी 6 भाइयों की मौजूदगी और सहमति से ही किया जाए। किसी एक या दो भाइयों के कहने पर कोई कदम न उठाया जाए। इसके बावजूद, बैंक के कुछ कर्मचारी गुपचुप तरीके से ढाबला माता गाँव स्थित उनके घर पहुँचे और अन्य भाइयों की अनुपस्थिति में एक भाई (कल्लू) से कुछ अज्ञात दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए।
मैनेजर ने झाड़ा पल्ला
इस पूरे घटनाक्रम पर जब पीड़ित परिवार ने संबंधित बैंक मैनेजर लखन पवार से बात की और उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो मैनेजर का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने इस गंभीर विषय पर किसी भी तरह की चर्चा करने से साफ मना कर दिया। मैनेजर ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें जहाँ शिकायत करनी है, वे कर सकते हैं।
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बैंक अधिकारियों के इस अड़ियल और संदेहास्पद रवैये से परेशान होकर अब पीड़ित किसान परिवार न्याय के लिए उच्चाधिकारियों और प्रशासन का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है। बिना पूर्ण सहमति के खाता खोलना और धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराना बैंकिंग नियमों का सीधा उल्लंघन है, जिसकी उच्च स्तरीय जाँच होना बेहद जरूरी है।
