सागर: रजौआ की महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं, 200 साल से निवास के बावजूद नहीं मिला पट्टा, पानी संकट भी गहराया
Sagar Collector Office: सागर के रजौआ गांव की महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और 200 साल से निवास के बावजूद भूमि पट्टा और पेयजल समस्या को लेकर प्रशासन से समाधान की मांग की। जनसुनवाई में जांच का भरोसा मिला।
- Reported By: सरजू पटेल | Edited By: प्रीतेश जैन
कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाएं (फोटो सोर्स- नवभारत)
Sagar Rajaua Women Protest : सागर शहर के कलेक्ट्रेट कार्यालय में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब ग्राम रजौआ के टपरा क्षेत्र की महिलाएं अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर जनसुनवाई में पहुंचीं। करीब 13 से अधिक परिवारों की महिलाएं हाथों में उम्मीद और सालों से लंबित समस्याओं का दर्द लेकर अधिकारियों के सामने पहुंचीं।
महिलाओं ने प्रशासन से स्पष्ट रूप से आवासीय भूमि के पट्टे और पेयजल संकट के समाधान की मांग उठाई। उनका कहना है कि उनका परिवार पिछले लगभग 200 वर्षों से रजौआ के टपरा क्षेत्र में निवास कर रहा है, लेकिन आज तक उन्हें भूमि का वैधानिक अधिकार यानी पट्टा नहीं मिल पाया है।
नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि पट्टा न होने के कारण वे सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित रह जाती हैं, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना प्रमुख है। उनका आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को आवेदन देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
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पेयजल की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण
महिलाओं ने यह भी बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से पेयजल संकट गंभीर समस्या बना हुआ है। गर्मी और सामान्य दिनों में भी पानी की उपलब्धता को लेकर काफी संघर्ष करना पड़ता है। कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं हो पाया है, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है।
पट्टे जारी करने की मांग
जनसुनवाई के दौरान महिलाओं ने अधिकारियों के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हुए मांग की कि जल्द से जल्द भूमि के पट्टे जारी किए जाएं और क्षेत्र में स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि मूलभूत सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी तो विकास की बातें केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगी।
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अधिकारियों ने दिया उचित कार्रवाई का भरोसा
अधिकारियों ने महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि ग्रामीणों के बीच अब भी सवाल बना हुआ है कि क्या उन्हें जल्द उनका अधिकार और सुविधाएं मिल पाएंगी या फिर यह समस्या आगे भी लंबित ही रहेगी।
